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Noida News: समझौते के बाद भी जमीन नहीं दे किसान, अब अधिग्रहण की तैयारी

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संभल। यूपीडा के द्वारा औद्योगिक गलियारा के लिए आपसी समझौते से भूमि न देने वाले किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर लेने की तैयारी की गई है। इस संबंध में यूपीडा ने जिला प्रशासन को पत्र जारी किया है। इसके मुताबिक, 11 हेक्टेयर से अधिक भूमि ऐसी है, जिसका किसानों ने बैनामा नहीं कराया। जबकि औद्योगिक गलियारे के लिए चिह्नित बाकी सभी भूमि का बैनामा कराया जा चुका है। चूंकि वर्तमान समय में औद्योगिक गलियारे को विकसित किया जाने लगा है तो लाजिमी ही अवशेष भूमि का अधिग्रहण जरूरी हो गया है।
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दरअसल, गंगा एक्सप्रेसवे किनारे गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर और अमावती कुतुबपुर में करीब 240 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित किया जा रहा है। भविष्य में इतनी ही भूमि और यूपीडा द्वारा क्रय करने की योजना तैयार किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, अभी इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। लेकिन इसके पहले अवशेष भूमि से संबंधित सभी मामलों को निपटाने की तैयारी की गई है।
यूपीडा ने जिला प्रशासन को पत्र जारी करके बताया कि खिरनी मोहिउद्दीनपुर में 5.530 हेक्टेयर, सारंगपुर में 1.903 और अमावती कुतुबपुर में 3.981 हेक्टेयर भूमि ऐसी है, जिसके किसानों के द्वारा बैनामे नहीं कराए गए हैं। ऐसे में इन किसानों की जमीन का अधिग्रहण भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्था में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 के अंतर्गत किया जाएगा।
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एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रदीप वर्मा ने बताया कि इसकी तैयारी शुरू कराई है। शासन अब बैनामा कराने की मोहलत नहीं देना चाहता है। ऐसे में अधिग्रहण की तैयारी की गई है।



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यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) द्वारा औद्योगिक गलियारे में जिले के छोटे-बड़े सभी कारोबारियों को प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। 60 से ज्यादा आवेदन यूपीडा के पास पहुंच चुके हैं। इन सभी ने 1000 स्क्वाॅयर मीटर का प्लॉट आवंटन के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा 10 ऐसे भी कारोबारी हैं जिन्होंने बड़े प्लॉट आवंटित किए जाने के लिए आवेदन किए हैं।


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मेंथा और हस्तशिल्प कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत



संभल की पहचान हड्डी-सींग के हस्तशिल्प उत्पाद और मेंथा कारोबार से होती है। यह दोनों ही कारोबार छोटी और बड़ी इंडस्ट्रीज के रूप में हैं। अब फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज भी बढ़ रही है। आलू का बड़ा कारोबार संभल से होता है। मेंथा फैक्टरी और हस्तशिल्प कारखाने संकरी गलियों में चलते हैं। प्रशासन ने शहर से बाहर संचालन के लिए आदेश भी कर दिए हैं। ऐसे में इन कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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