पुन्हाना। नए कृषि कानूनों को वापस लेने के संबंध में किसानों का आंदोलन अब फिर तेजी पकड़ने लगा है। जिले के सुनहेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन बुधवार को 23वें दिन भी जारी रहा। हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बसे मेवात के किसानों, खाप और पालों की महापंचायत बुलाने के संबंध में बुधवार को आंदोलन स्थल पर बैठक हुई। इस दौरान 7 फरवरी को सुनहेड़ा बॉर्डर पर किसानों, खाप और पालों की महापंचायत बुलाने का फैसला लिया गया। इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राकेश टिकैट और किसान नेता गुरनाम चढूनी को भी बुलाया गया। बैठक की अध्यक्षता मीलखेड़ला मदरसा के संचालक मौलाना अरशद मीलखेड़ला ने की।
किसान नेता अब्दुल रशीद एडवोकेट, समय सिंह एडवोकेट और मौलाना अरशद मीलखेड़ला आदि ने बताया कि सरकार किसानों की मांगों को हल्के में ले रही है। दिल्ली में सभी धरना स्थलों पर बिजली, पानी और इंटरनेट की सुविधा बंद कर दी गई है। इसके अलावा कटीले तार और सीमेंट से बने बैरिकेड लगाकर सरकार की मंशा अब किसानों के प्रति ठीक नजर नहीं आ रही है। ऐसा लगता है कि सरकार किसानों से बातचीत के बजाए अपनी ताकत से आंदोलन को कुचलने पर तुली है। उन्होंने कहा कि बैठक में 6 फरवरी को भारत बंद को कामयाब कराने की चर्चा की गई। वहीं, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बसे मेवात के किसानों, खाप और पालों की महापंचायत करने का फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राकेश टिकैट और किसान नेता गुरनाम चढूनी को पंचायत में बुलाने के लिए न्योता दिया गया है। सरकार के रवैये से देश भर के किसानों में भारी नाराजगी है। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती है, तब तक किसानों की घर वापसी नहीं होगी। इस मौके पर जैंमत के सरपंच हाकम खान, बुरहान सलंबा, अब्दुल रशीद आदि मौजूद रहे।