-मेवात क्षेत्र में हुई थी प्याज की बंपर पैदावार, दाम गिरने से फसल उजाड़ने की फिराक में हैं किसान
-नई फसल लगाने की तैयारी में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। मेवात जिले में प्याज की बंपर पैदावार के चलते प्याज के लगातार गिरते दामों ने किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। जिससे क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही है। हालात यह हैं कि कई गांवों में किसान अपनी तैयार खड़ी प्याज की फसल को उजाड़कर आगामी फसल की तैयारी कर ली हैं।
क्षेत्र के किसान सत्तार , खलील अहमद , आंसू , सूबेदार, हसन अल्वी, मोहम्मद, अब्दुल रुजदार, साबिर हुसैन बाघोडिया, सलीम अल्वी सहित अन्य किसानों का कहना है कि प्याज बंपर पैदा हुई है जिसके चलते दिल्ली एनसीआर में प्याज के दामों में गिरावट आई और यहां के प्याज के दाम 400 से 500 रुपए मन मंडी में ली जा रही है। जबकि मेवात की प्याज जब मंडी में नहीं आई थी, उस समय एक हजार से लेकर 1200 रुपए प्रति मन के दाम किसानों को दिए गए थे। लेकिन अब स्थिति उलट है। किसानों को न तो प्याज का वाजिब दाम मिल रहा है और न ही सरकार की ओर से कोई मदद। इसके चलते किसान खुद अपनी ही लगाई गई प्याज की फसल को उजाड़ने की सोच रहा है। सरकार को इस दिशा में कोई कारगर कदम उठाना चाहिए। ताकि किसानों को राहत मिल सके।
बोले किसान
खंड फिरोजपुर झिरका के दर्जनों गांवों में इस बार बड़े पैमाने पर प्याज की खेती की गई थी। लेकिन जैसे ही मेवात में प्याज की फसल पककर तैयार हुई, बाजार में दाम अचानक गिर गए। जो प्याज लगभग 3 महीने पहले 60 से 80 रूपये किलो मार्केट में बिक रही थी वह प्याज अब दुकानों पर 20 से 30 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है।
सूबेदार, निवासी भौंड।
एक एकड़ में प्याज की फसल तैयार करने पर लाखों रुपये का खर्च आता है। किसान कर्ज लेकर, जेवर गिरवी रखकर या साहूकार से ब्याज पर उधार लेकर खेती करता है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि प्याज का निर्यात तुरंत खोला जाए, ताकि बाजार में मांग बढ़े और किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।
-अब्दुल रूजदार, किसान, गांव भौंड
74 100 हेक्टेयर भूमि में इस बार प्याज उगाई गई है। किसान की हालत सुधरेगी तो देश और सरकार दोनों मजबूत होंगे। लेकिन भाव निरंतर गिरने से किसानों का हौंसला टूट रहा है। सरकार की ओर से भी इस मामले में कोई मदद नहीं मिल रही है।
-आशु, किसान
मंडी में किसानों से प्याज 7 रुपये से लेकर 9 रुपये किलो की खरीद की जा रही है । इससे किसानों में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से वह फसल को स्वयं उजाड़ने पर मजबूर हैं। ताकि नई फसल लगाई जा सके।
-साबिर, किसान, गांव बाघोडिया
फोटो। सूबेदार, अब्दुल रूजदार, आसू, साबिर।