- ग्रेनो वेस्ट के इटेडा गांव में खाद्य विभाग ने की कार्रवाई, हानिकारक रंग, धनिया की भूसी और सरसों के तेल से तैयार हो रहे थे मसाले
- प्राथमिकी दर्ज, लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू, जांच के लिए भेजे गए नमूने
नंबर गेम
13 नमूने लिए गए
2 किलो पीला रंग बरामद
2 किलो लाल रंग बरामद
60 किलो सरसों का तेल जब्त
600 किलो धनिया की डंडी की भूसी मिली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट के इटेडा गांव में खाद्य विभाग की टीम ने मिलावटी मसाले बनाने वाली फैक्टरी का खुलासा किया है। शुक्रवार देर शाम की गई कार्रवाई में टीम को मसालों में मिलावट के लिए हानिकारक रंग, धनिया की डंडी की भूसी और सरसों के तेल का इस्तेमाल किए जाने के साक्ष्य मिले। मौके से विभिन्न मसालों के 13 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विभाग ने फैक्टरी से बड़ी मात्रा में कच्चा माल और तैयार मसाले जब्त कर इकाई को सील कर दिया है। संचालक के खिलाफ बिसरख कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। साथ ही फैक्टरी का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इटेडा गांव स्थित धर्मेश इंडस्ट्रीज की मसाला निर्माण इकाई में मिलावट की सूचना मिली थी। सहायक आयुक्त खाद्य-2 सर्वेश मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार शाम फैक्टरी पर छापा मारा। जांच के दौरान मिर्च और हल्दी पाउडर में हानिकारक रंग मिलाने, धनिया पाउडर में डंडी की भूसी डालकर मात्रा बढ़ाने और मसालों को चमकाने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल करने की बात सामने आई। अधिकारियों ने मौके से मिर्च बीज, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मिर्च पाउडर समेत विभिन्न सामग्री जब्त की।
फैक्टरी से 600 किलो धनिया की डंडी की भूसी, 1050 किलो हल्दी पाउडर, 525 किलो मिर्च पाउडर, 315 किलो धनिया पाउडर, 300 किलो साबुत मिर्च, 125 किलो मिर्च बीज और 60 किलो सरसों का तेल बरामद हुआ। इसके अलावा दो-दो किलो पीला और लाल रंग भी मिला। अधिकारियों के अनुसार, मिर्च पाउडर में मिर्च बीज और डंडी की भूसी मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जा रही थी। हल्दी और मिर्च में रंग का इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, मिलावट की पुष्टि के लिए नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
पैकेट में बिक्री नहीं बढ़ी तो खुले में बेचने लगे मसाले
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फैक्टरी संचालक ने शुरुआत में ‘बचन मसाला’ नाम से पैकेट तैयार कर बाजार में बेचने की कोशिश की थी। बिक्री नहीं बढ़ने पर मसालों को खुले में बेचना शुरू कर दिया। इनकी आपूर्ति रेहड़ी-पटरी और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले विक्रेताओं तक की जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि फैक्टरी एक साल से अधिक समय से संचालित हो रही थी। फिलहाल इकाई को सील कर दिया गया है। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नवरात्रि पर्व को दृष्टिगत रखते हुए जनपद के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारीगण खा