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ग्रेनो के पूर्व सीईओ रमा रमण से पूछताछ के लिए शासन से मांगी अनुमति

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पूर्व सीईओ रमा रमण से पूछताछ के लिए शासन से मांगी अनुमति
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ग्रेटर नोएडा। भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट मेरठ के आदेश पर बीटा-2 थाना पुलिस ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ रमा रमण (वर्तमान में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव) समेत पांच अधिकारियों-बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन सवा साल बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ऐसे में अपर पुलिस आयुक्त ने इस मामले पूर्व सीईओ से पूछताछ के लिए शासन से अनुमति मांगी है। हालांकि एक अगस्त 2019 को तत्कालीन एसएसपी ने भी शासन को पत्र भेजकर पूछताछ की अनुमति मांगी थी।
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पुलिस के अनुसार, बिसरख निवासी कुलदीप भाटी ने आरोप लगाया था कि उसकी जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही बिल्डर को आवंटन कर दिया गया। आरोप था कि कुलदीप ने जमीन वापस मांगी तो आबादी दूसरी जगह शिफ्ट कर दी गई थी। आबादी शिफ्ट करने का आदेश करने वाले अधिकारियों का तबादला हो गया। अब पूर्व के अधिकारियों का आदेश प्राधिकरण में नहीं माना जा रहा है। इससे किसानों के मामले अटक गए हैं। उनके हाथ से आबादी की जमीन भी बिल्डर को चली गई और दूसरी जगह शिफ्ट की गई जमीन भी उन्हें नहीं मिल पाई। यह भी आरोप था कि मामले का निस्तारण करने के लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस मामले में कुलदीप भाटी की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट मेरठ ने तत्कालीन सीईओ व वर्तमान में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव रमा रमण, मीना भार्गव (वर्तमान में यमुना प्राधिकरण की महाप्रबंधक नियोजन), ऋतुराज ब्यास ग्रेटर नोएडा के टाउन प्लानर, वैभव जैन बिल्डर व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अन्य संलिप्त अधिकारी पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश 1 मार्च को दिया था। इसके बावजूद केस दर्ज नहीं किया गया तो कुलदीप भाटी ने सीएम, आईजी, एसएसपी आदि को पत्र भेज व ट्वीट कर शिकायत की थी। तब, तत्कालीन कासना और वर्तमान में बीटा-2 थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में पूर्व सीईओ से पूछताछ के लिए पत्र भेजकर शासन से अनुमति मांगी गई है।
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