संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। व्यासपुर न्यायालय परिसर में पांच कोर्ट हैं। बार एसोसिएशन व्यासपुर में भी 450 से ज्यादा वकील रजिस्टर्ड हैं। लोगों के केसों की पैरवी करने के लिए वकीलों को पक्के चैंबर नहीं मिल पाए हैं। जिन चैंबर में वकील बैठते हैं उनकी छत पर लेंटर न होकर सीमेंट की चादर है। हालांकि न्यायालय की तरफ से वकीलों को स्थायी चैंबर बनाने के लिए जगह मिली हुई है।
चैंबरों का निर्माण वकीलों को अपने पैसे से करवाना है। वहीं वकीलों का कहना है कि वह चैंबर के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ वकीलों का तो यहां तक कहना है कि सरकार को चैंबर निर्माण करके देना चाहिए। यहां 450 वकील पंजीकृत हैं, लेकिन नियमित प्रैक्टिस करीब 225 ही कर रहे हैं।
पहले व्यासपुर न्यायालय कपालमोचन रोड स्थित तहसील भवन के प्रथम तल पर स्थित था। बाद में जगाधरी रोड पर वीटा मिल्क प्लांट के नजदीक न्यायालय का नया भवन बनाया गया। इसके सामने ही वकीलों के चैंबर बने हैं। इन चैंबर की ईंटों की दीवारें खड़ी करके वकीलों ने ऊपर सीमेंट की चादर डाल रखी है।
बाद में वकीलों को इन चैंबर के सामने ही स्थायी चैंबर बनाने के लिए जगह दे दी गई। अभी तक एक भी वकील ने अपने चैंबर का निर्माण शुरू नहीं किया है। एक बार तो अस्थायी चैंबरों को तोड़ने की कार्रवाई भी शुरू हुई थी, लेकिन तब वकीलों ने रोष जताते हुए इसे रुकवा दिया था।
चैंबर बनाने में खर्च बहुत ज्यादा आएगा : मोहित बंसल
बार एसोसिएशन व्यासपुर के अध्यक्ष एडवोकेट मोहित बंसल ने बताया कि जहां पर वकीलों के लिए स्थायी चैंबर बनने हैं, उनकी ड्राइंग भी बन चुकी है। जब उन्हें चैंबर बनाने के लिए जमीन दी गई, तब तक वह अस्थायी चैंबर का निर्माण करवा चुके थे। जिन्हें बनाने पर ही कई लाख रुपये खर्च आया था। ऐसे में एक स्थायी चैंबर का निर्माण करने पर ही औसतन पांच लाख रुपये से ज्यादा का खर्च आना है। यह राशि बहुत ज्यादा है। वकीलों का पहले ही काफी पैसा अस्थायी चैंबर पर खर्च हो चुका है। फिलहाल 110 चैंबर बनाने के लिए जगह दी गई है।