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Noida News: डिग्री के बाद भी डिलीवरी का काम कर रहा युवा

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- गिग वर्किंग प्लेटफॉर्म बन रहा तत्काल आय का साधन
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नोएडा(संवाद)। जिले में इन दिनों पढ़े-लिखे युवाओं का रुझान तेजी से गिग वर्क की ओर बढ़ रहा है। जोमाटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म पर 12 वीं से लेकर स्नातक तक के युवा बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं। ज्यादातर युवा इसे मजबूरी में कर रहे हैं। वहीं कई इसे पार्ट टाइम नौकरी की तरह देखते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबी दौड़ और सीमित भर्तियों के बीच शहर का पढ़ा-लिखा युवा अब गिग वर्क की ओर रुख कर रहा है।

शहर के विभिन्न सेक्टरों में बातचीत के दौरान पता चला कि कई युवा सालों से सरकारी नौकरी पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे, लेकिन चयन न होने और भर्तियों में देरी के कारण उन्हें वैकल्पिक रोजगार अपनाना पड़ा। कई युवा घर में पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए यह काम करते हैं। गिग वर्क में हर हफ्ते में आपके किए गए काम का भुगतान कर दिया जाता है। गिग वर्क की ओर बढ़ता यह रुझान साफ बता रहा है कि पढ़ा-लिखा युवा अब अस्थायी विकल्पों पर निर्भर होता जा रहा है।
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सेक्टर-62 निवासी स्वदेश कुमार (स्नातक) ब्लिंकिट में डिलीवरी पार्टनर हैं। वह सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक काम करते हैं। उनका कहना है कि इसमें रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जबकि नौकरी में उन्हें 15 से 18 हजार रुपये ही मिलते थे। लेकिन भविष्य में किसी तरह की ग्रोथ नहीं है।



सेक्टर-57 निवासी विकास यादव (स्नातक) रैपिडो से जुड़े हैं। उनका कहना है कि काम में समय की कोई दिक्कत नहीं है, जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकते हैं।
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सेक्टर-12 निवासी शोएब (स्नातक) जोमाटो से जुड़े हैं। वह बताते हैं कि स्नातक के बाद दो-तीन वर्षों तक नौकरी की तलाश करते रहे। कई बार परीक्षा भी दी लेकिन चयन नहीं हो पाया। घर में पैसों की जरूरत और परिवार का दबाव बढ़ने पर उन्हें यह काम शुरू करना पड़ा।
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