सीबीआई ने बृहस्पतिवार शाम गौतमबुद्ध नगर के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कार्यालय के दो अधिकारियों को आठ लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर सीबीआई कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। देर रात तक सीबीआई ने आरोपियों के घर और दफ्तर में भी छानबीन की। फिलहाल, इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच हो रही है।
सीबीआई के अनुसार, नोएडा में रणपाल सिंह की सिक्योरिटी गार्ड की फर्म है। फर्म पर ईपीएफओ के 74 लाख रुपये बकाया थे जो ब्याज और जुर्माना बढ़ने से 2 करोड़ रुपये हो चुके थे।
आरोप है कि पेंडिंग बकाये के मामले को निपटाने के लिए ईपीएफओ के असिस्टेंट कमिश्नर बृजेश रंजन झा और लेखाधिकारी नरेंद्र कुमार झा ने नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में मामला आठ लाख रुपये में तय हो गया।
इसके बाद रणपाल सिंह ने मामले की शिकायत गाजियाबाद स्थित सीबीआई की ब्रांच में की। ब्रांच के इंस्पेक्टर अजय गहलोत के नेतृत्व में सीबीआई की टीम गठित की गई। टीम ने बृहस्पतिवार को नोएडा सेक्टर-24 स्थित ईपीएफओ के ऑफिस में रणपाल सिंह को पूर्व योजना के मुताबिक आठ लाख रुपये की रिश्वत लेकर भेजा।
इसी दौरान टीम ने नरेंद्र कुमार झा और बृजेश रंजन झा को मौके पर ही रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत लेते हुए पकड़े गए दोनों अधिकारियों को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश अमित वीर सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। दोनों अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में 28 अगस्त तक के लिए जेल भेज दिया।
इधर, पीएफ कमिश्नर नरेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की अन्य जानकारी फिलहाल सीबीआई ने साझा नहीं की है। एफआईआर की कॉपी और बाकी डिटेल का इंतजार कर रहे हैं।