-सीबीएसई ने स्कूलों को दिए इको क्लब के माध्यम से जागरूकता फैलाने के निर्देश
-कहा, छात्रों को अपनी छोटी मूर्तियां और कलाकृतियाँ बनाने को किया जाए प्रोत्साहित
-चर्चा, वाद-विवाद पोस्टर व सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा है कि स्कूलों बच्चों को प्राकृतिक सामग्री से बनी कलाकृतियों का उपयोग करने के लिए जागरूक करें। बोर्ड की ओर से स्कूलों को कहा गया है कि वे अपने ईको क्लब के माध्यम से बच्चों में जागरूकता फैलाएं। छात्रों को अपनी छोटी प्राकृतिक सामग्री से बनी मूर्तियां और कलाकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। बोर्ड ने स्कूलों को कक्षाओं के स्तर के हिसाब से अलग-अलग गतिविधियां भी सुझाई हैं।
सीबीएसई के अनुसार, विभिन्न आयोजनों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) कलाकृतियों का उपयोग किया जा रहा है। पीओपी मूर्तियां गैर-जैव निम्नीकरणीय और जल में अघुलनशील होती हैं। विसर्जन के समय ये जिप्सम और रासायनिक पेंट से विषाक्त भारी धातुओं जैसे हानिकारक पदार्थों को जल निकायों में छोड़ती हैं। इससे जल में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। जलीय जीवन खतरे में पड़ जाता है, पेयजल स्रोत दूषित हो जाते हैं और अक्सर आस-पास रहने वाले लोगों में त्वचा और श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए प्राकृतिक सामग्रियों से बनी कलाकृतियों का उपयोग किया जा सकता है, जो जल में आसानी से घुल जाती हैं और प्रदूषण नहीं फैलाती हैं। बोर्ड ने इस संबंध में स्कूलों को कहा है कि वह चर्चाएं, वाद-विवाद, पोस्टर बनाने की प्रतियोगितएं, सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम, व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित करें। इनमें छात्रों को अपनी छोटी प्राकृतिक सामग्री से बनी मूर्तियां और कलाकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।