प्रदूषण से बिगड़े हालात का अंदाजा एक दिवसीय आरोग्य मेले में पहुंचे मरीजों की तकलीफ से लगाया जा सकता है। आरोग्य मेले के नोडल अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि उपचार के लिए पहुंचे मरीजों की संख्या 1153 दर्ज की गई, जिनमें इस बार सबसे ज्यादा 224 मरीज गेस्ट्रो के थे जबकि 125 मरीजों ने सांस लेने में हो रही तकलीफ बताई। चर्म रोगों से परेशान 200 लोग पहुंचे। बुखार के 35 मरीजों की मलेरिया जांच की गई, कोई भी पॉजिटिव नहीं मिला।
कोरोना के लक्षण वाले 234 मरीज कोविड हेल्प डेस्क पर पहुंचे, जिनमें से 20 की एंटीजन जांच हुई। इसमें भी कोई पॉजिटिव नहीं मिला। मधुमेह से पीड़ित 23 मरीजों ने डॉक्टरी परामर्श लिया। हाइपर टेंशन के 24 व अन्य बीमारियों से पीड़ित 368 मरीज आरोग्य मेले में पहुंचे। इनमें 14 मरीजों को रेफर किया गया।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस से रहें सावधान
प्रदूषण की वजह से सेहत के लिए घातक केमिकल, कार्बन और बैक्टीरिया गले के रास्ते पेट तक पहुंचते हैं, जिससे आंतो में सूजन, पेट में दर्द, गैस्ट्रोएंटेराइटिस के अलावा वायरल डायरिया का खतरा बढ़ गया है। संक्रमित फल, खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री के अलावा दूषित पानी इस बीमारी के फैलने का बड़ा कारण है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अपेक्षाकृत स्वच्छता का अभाव आसानी से इस बीमारी का शिकार बना सकता है। -डॉ. प्रकाश जैन, पूर्व सचिव-आईएमए नोएडा
इलाज कराने पहुंचे 20 फीसदी बच्चे
बदलते मौसम का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। रोजाना अस्पतालों की ओपीडी में करीब 10 फीसदी बच्चे पहुंचते हैं। रविवार को आरोग्य मेले में पहुंचने वाले मरीजों में 20 फीसदी बच्चे शामिल रहे। पुरुष लाभार्थियों की संख्या 514 और महिलाओं की संख्या 416 रही। इस दौरान 223 बच्चे भी उपचार के लिए पहुंचे। अधिकांश बच्चे पेट की खराबी, त्वचा रोग और बुखार से पीड़ित रहे।