संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहरवासी पहले ऑटो चालकों की मनमानी से परेशान थे। अब ई-रिक्शा चालकों ने लोगों की नाक में दम करके रख दिया है। ई-रिक्शा चालक जहां देखा वहीं ब्रेक लगा रहे हैं। इससे सड़क पर हर समय हादसा होने का खतरा रहता है। दूसरा यह रिक्शा शहर की यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। ट्रैफिक पुलिस की ओर से ई-रिक्शा चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
दो साल पहले तक शहर की सड़कों पर हर जगह ऑटो ही ऑटो दिखाई देते थे। परंतु, अब हर तरफ ई-रिक्शा का बोलबाला है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि शहर की सड़कों पर ऑटो से ज्यादा रिक्शा ज्यादा हो चुकी हैं। 15-16 साल की उम्र के बच्चों से लेकर 80-85 साल की उम्र तक बुजुर्ग तक सड़कों पर ई-रिक्शा चला रहे हैं। 50 प्रतिशत चालकों के पास तो ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं है। साथ ही उन्हें वाहन चलाने का न तो अनुभव है और न ही नियमों का ज्ञान है।
वह सवारी को देख कर जहां देखा वहीं ब्रेक लगा देते हैं। शहरवासी रमेश राणा का कहना है कि ई-रिक्शा के खड़े होने के लिए न तो कोई स्थान चिन्हित है और न ही यह सड़क से नीचे खड़े होते हैं। सड़क की एक लेन पर तो ई-रिक्शा चालकों ने ही कब्जा कर रखा है। यहां तक की मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर एक साथ 10 से 15 रिक्शा खड़े रहते हैं।
गेट के आगे इनका कब्जा होने से न तो कोई बाहर से अंदर जा सकता है और न ही अंदर से बाहर आ पाता है। यदि कोई इन्हें आगे-पीछे खड़े को होने को कहता है तो यह लड़ने पर उतारू हो जाते हैं। संदीप कुमार का कहना है कि दो लोगों के बैठने के लिए बनी ई-रिक्शा में छह से सात सवारी बैठाई जा रही हैं। सड़कों पर अचानक ब्रेक लगा दिए जाने से पीछे आ रहे अन्य वाहन चालकों को दिक्कत होती है। उनके साथ हादसा भी हो सकता है। ई-रिक्शा चालकों पर सख्ती करनी चाहिए।
ई-रिक्शा के यूनियन नेताओं को बुलाकर समझाया जाएगा। उन्हें कहा जाएगा कि वह चालकों को समझाएं कि वह यातायात नियमों का पालन करें। ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। - कुशलपाल राणा, यातायात थाना प्रभारी।