-आरोपियों पर श्रमिक आंदोलन की आड़ में सुनियोजित साजिश का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने नोएडा में अप्रैल में हुई श्रमिक हिंसा से जुड़े कई मुकदमों में सुनवाई करते आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। इनमें प्रमुख आरोपी आकृति चौधरी के चार में से तीन अर्जियां निरस्त की गईं, जबकि एक मामले में उसे राहत मिली। इसके अलावा आदित्य आनंद चौहान की दो व सत्यम वर्मा, रूपेश राय, सृष्टि गुप्ता और हिमांशु ठाकुर की एक-एक मामले में जमानत खारिज कर दी गई। सभी आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।
अभियोजन के अनुसार 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के विभिन्न सेक्टरों-64, 65, 67, 68, 69 और ट्रांसपोर्ट नगर, फेज-1, फेज-2, फेज-3 क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में मौजूद उपद्रवियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया। आरोप है कि श्रमिक संगठनों की आड़ में सुनियोजित तरीके से भीड़ इकट्ठा की गई, जिसमें शामिल लोग लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर और घातक हथियार लेकर विभिन्न कंपनियों में घुस गए थे।
अभियोजन के अनुसार आकृति चौधरी, रूपेश राय, आदित्य आनंद, सृष्टि गुप्ता, हिमांशु ठाकुर, सत्यम वर्मा, मनीषा चौहान, मधुरेश राय, प्रियंबदा शर्मा, प्रेरित लोढ़ा, शिवानी कौल आदि ने मिलकर व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से मजदूरों को भड़काया और हिंसक आंदोलन की योजना बनाई। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि आकृति चौधरी को शासन-प्रशासन के दबाव में झूठा फंसाया गया है। आरोपी 12 अप्रैल 2026 से जिला कारागार में निरुद्ध है।
न्यायालय ने माना कि केस डायरी से स्पष्ट होता है कि आरोपियों के खिलाफ केवल सामान्य उपस्थिति का आरोप नहीं, बल्कि घटना से पूर्व ही श्रमिक आंदोलन की योजना बनाने का कथन है। अपराध की प्रकृति, आरोपियों की भूमिका, उपलब्ध सामग्री तथा मामले की गंभीरता को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। हालांकि एक दूसरी अदालत ने थाना फेज-2 नोएडा में दर्ज एक अन्य मामले में आकृति चौधरी की जमानत स्वीकार कर ली। सत्र अदालत ने आदित्य आनंद चौहान, सत्यम वर्मा, रूपेश राय, सृष्टि गुप्ता और हिमांशु ठाकुर की भी जमानत अर्जी खारिज कर दी।