-साइबर उत्पीड़न से परेशान अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट ने दर्ज कराई प्राथमिकी, कई लोगों पर गंभीर आरोप
-बीटा-2 कोतवाली पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। साइबर उत्पीड़न और मानहानि से परेशान एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट ने शनिवार को बीटा-2 कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि लंबे समय से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर उनके खिलाफ झूठी, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। पुलिस ने आईटी अधिनियम की धारा-66 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पिछले कई महीनों से उनके और अन्य पैरा खिलाड़ियों के खिलाफ ई-मेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से लगातार झूठी और मानहानिकारक शिकायतें भेजी जा रही थीं। उनका आरोप है कि इसका मकसद उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना, उनके खेल जीवन में बाधा डालना था। इस संबंध में 3 जून 2026 को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन थाना पुलिस की ओर से लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर को ई-मेल के जरिए मामले की जानकारी दी।
जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि संदिग्ध ई-मेल खातों से हर्ष दीक्षित और राघव मिश्रा नामक व्यक्तियों की पहचान हुई है। उनके मोबाइल नंबर भी इन खातों से जुड़े पाए गए हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई। पीड़िता ने खुद को एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता, संयुक्त राष्ट्र एसडीजी एक्शन अवार्डी और दिव्यांगजन अधिकारों के लिए कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता बताया है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूर्णतः असत्य हैं। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान हुए उनके सभी डोप परीक्षणों की रिपोर्ट नेगेटिव रही है। शिकायत में यह भी कहा गया कि मेरठ के अनमोल वशिष्ठ, आयुष वर्मा और अनुभव चौधरी, मथुरा के रामरतन सिंह और मुजफ्फरनगर के रवि ठाकुर जैसे अन्य खिलाड़ियों के खिलाफ भी इसी तरह झूठी शिकायतें भेजी जा रही हैं। वहीं कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की की जारी है।