-800 मिलियन से अधिक लोगों में समस्या का किया जा रहा दावा
-5-15 वर्ष की आयु के बच्चे दृष्टि दोष व अपवर्तक त्रुटियों से पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। अब एमिटी की छात्रा संजना चौहान द्वारा स्थापित संस्था दृष्टि के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) मिलकर छात्रों की दृष्टि में सुधार को लेकर काम करेगा। इसके लिए दोनों के बीच बैठक आयोजित की गई। छात्रों में तेजी से बढ़ती आंंखों की समस्या को ध्यान में रखते हुए एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन के दौरान यह निर्णय लिया गया।
सेक्टर 125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में छात्रों की दृष्टि सुधार के प्रति जागरूकता चलाने वाली विजन हेल्थ चैंपियंस की ओर से युवा राजदूतों का सशक्तिकरण नामक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का शुभारंभ विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीम लीड (एनसीडी एंव कमोरबिडिटिस) डॉ. युतारो सेतोया, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के गैर संचारी रोग प्रभाग के प्रमुख और वैज्ञानिक डाॅ आरएस धालीवाल, दृष्टि की संस्थापक एवं युवा राजदूत संजना चौहान, एमिटी विद्यालय समूह की चेयरपर्सन डा अमिता चौहान और सीबीएसई के निदेशक (संबद्धता) जय प्रकाश चतुर्वेदी द्वारा किया गया।
संस्थान ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य भारत में किशोरों की आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती जन स्वास्थ्य चिंता पर मंथन करना रहा, जिसमें निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) में खतरनाक वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीम लीडर (डॉ. युतारो सेतोया ने कहा कि दृष्टि समस्या दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है। 5-15 वर्ष की आयु के बच्चे और किशोर दृष्टि दोष और अपवर्तक त्रुटियों से पीड़ित हैं। 800 मिलियन से अधिक लोगों को दृष्टि की समस्या है। इसे देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने एक वैश्विक पहल ग्लोबल स्पेक्स 2030 शुरू की है।