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Noida News: राम मंदिर के लिए साक्ष्य जुटाने वाले डॉ. बुद्ध रश्मि मणि पद्मश्री से सम्मानित

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-नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
-भारतीय विरासत संस्थान के पूर्व कुलपति व एएसआई के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक रह चुके हैं

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा।
सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान के पूर्व कुलपति व एएसआई के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को पद्मश्री सम्मान से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को नवाजा। उन्होंने अयोध्या के राम जन्मभूमि में उत्खनन करके मंदिर के साक्ष्य तलाशने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

डॉ. मणि ने अब तक देश के लिए 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन का निर्देशन किया। दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन जैसे स्थलों पर किए गए उत्खनन उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं। अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर मामले में ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत कर न्यायिक प्रक्रिया को निर्णायक दिशा देने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक व वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. बुद्ध रश्मि मणि को सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पुरातत्व, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। वर्तमान में डॉ. मणि सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच), नोएडा में पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे इसी संस्थान के कुलपति भी रह चुके हैं। 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर उनके निर्देशन में अयोध्या के विवादित स्थल पर उत्खनन कराया गया। इसमें प्राप्त उत्तर भारतीय नागर शैली के अवशेष, स्तंभों के अधिष्ठान और अभिलेख न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुए, जिनके आधार पर आज भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
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अब तक मिले हैं ये सम्मान
लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कनफेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (2017)

शारदा शताही समान ( 2023)

जय श्री सत्य बालाजी संकट मोचन अभिनन्दन, गोरखपुर, (2023)

मंजू शुरू सम्मान, भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज द्वारा दिया गया (2023)



पद्मश्री की घोषणा के बाद अमर उजाला से क्या बोले डॉ. मणि

मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि सरकार ने मेरे कार्यों को पहचान दी और मुझे इस काबिल समझा। भारतीय इतिहास बहुत प्राचीन, एक अथाह सागर जैसा है, अभी बहुत कुछ खोजना और जानना बाकी है।
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