लखनऊ। दीपावली पर घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विधि-विधान से हम लक्ष्मी-गणेश को पूजते हैं। उनसे सुख-समृदि्ध का आशीष मांगते हैं। पर्व के बाद जब बारी आती है पुराने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और पूजन सामग्री, माला-फूल (निर्माल्य), देवी-देवताओं के वस्त्रों के निस्तारण की तो बहुत से लोग गोमती नदी की ओर रूख करते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि गोमती भी जीवनदायिनी हैं। उन्हें भी माता की तरह पूजा जाता है।
लोग पुल से या नदी किनारे से निर्माल्य को पन्नी में भरकर कचरे की तरह फेंक देते हैं। बहुत सी सामग्री पुल की रेलिंग के किनारे फंस जाती है। ये एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत करता है। हम भूल जाते हैं कि ऐसा करके हम न सिर्फ देवी-देवताओं की मूर्तियों का अनादर कर रहे हैं बल्कि उस मां का आंचल भी मैला कर रहे हैं, जिनके जल से हमें जीवन मिलता है।
यह है उपाय : पुरानी मूर्तियों को अपनी काॅलोनी या मोहल्ले में किसी एक स्थान पर एकत्र करें। इसके बाद नगर निगम को सूचित कर सभी सामग्री को एक साथ उठवा कर निस्तारण के लिए भेज सकते हैं।
यहां करें संपर्क : भाजपा पार्षद रंजीत ने शहर में 15 दिन का अभियान चलाकर मूर्तियों को एकत्र कराने का संकल्प लिया है। आप उनसे भी सहयोग ले सकते हैं। इसके लिए उनके मोबाइल नंबर 9415414111 पर संपर्क किया जा सकता है।
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद
गोमती नदी में मूर्तियां, माला-फूल आदि फेंकते लोग। - फोटो : संवाद