सेक्टर 14ए से गुजरते वक्त उन्होंने कुछ देर कांवड़ शिविर में आराम किया। उन्होंने बताया कि वह पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं और पूरे परिवार के साथ जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनके सबसे छोटे बेटे के जन्म लेने के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। ऑपरेशन हुआ और उसके बाद कई दिनों तक एनआईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट में रखना पड़ा।
दिव्यांग होने के कारण चल फिर न पाने वाले अमित ने घर में ही एक परचून की दुकान चलाकर गुजारा करते हैं। इस ऑपरेशन ने मानो उन्हें तोड़ दिया हो। तब बाबा शिव से मन्नत मांगी थी कि सबकुछ अच्छा हो जाए और बेटा स्वस्थ हो जाए, मनोकामना पूरी होने के बाद अब वह अपने परिवार संग हरिद्वार गंगा जल लेने के लिए निकले हैं।
हंसते खेलते इस परिवार में सब एक दूसरे से जुड़े और एक दूसरे के पूरक हैं। हर मोर्चे पर उनकी पत्नी अनीता उनका साथ देती है। इसी साथ को गांठ बांधते हुए पूरा परिवार अमित की व्हीलचेयर पर ही बाबा भोलेनाथ का नाम लेकर निकल पड़ा।