सीजेपी प्रदर्शन में शामिल होने वाले जीबीयू के छात्र अक्षय त्रिपाठी को नोटिस जारी होने के मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी डीएम ने छात्र को नोटिस जारी कर दिया। जबकि पुलिस और प्रशासन ने इन अफवाह का खंडन किया है और कहा है कि पुलिस कमिश्नरेट के मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्ध नगर की तरफ से नोटिस जारी किया गया था। जो वापस ले लिया गया है। जिलाधिकारी की तरफ से यह नोटिस जारी नहीं किया गया।
प्रयागराज निवासी अक्षत त्रिपाठी को कार्यपालक कार्यालय मजिस्ट्रेट की तरफ से एक नोटिस जारी हुआ था। आरोप लगाया था कि वो सीजेपी के धरने में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को उकसा रहे थे। उनके बीच सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैला रहा था। शिकायत थाना ईकोटेक-1 में तैनात उप निरीक्षक शिवा पांडेय ने अपनी आख्या के माध्यम से दर्ज कराई थी।
प्रभारी निरीक्षक थाना ईकोटेक-1 गौतमबुद्धनगर द्वारा आगे अग्रसारित किया गया। मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्ध नगर की तरफ से छात्र को 5 लाख के मुचलका का नोटिस जारी किया गया। विवाद के बाद पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है।
वहीं सोशल मीडिया पर नोटिस को जिलाधिकारी मेधा रूपम का बताकर अफवाह फैलाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करार दिया है। मामला बढ़ने और डीएम के नाम से अफवाह फैलाने के बाद प्रशासन को आगे आना पड़ा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश उनकी तरफ से जारी नहीं किया गया है।
वहीं पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्ध नगर की तरफ से त्रुटिपूर्ण नोटिस जारी किया गया। जो वापस ले लिया गया है। डीएम ने यह आदेश जारी नहीं किया है।