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Noida News: हर गांव के 5 प्रतिशत प्लॉट का डिजिटल ब्यौरा होगा तैयार

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नोट- फोटो, नोएडा प्राधिकरण दफ्तर। ऑनलाइन न चलाएं।
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- नोएडा प्राधिकरण बना रहा नई व्यवस्था, ब्यौरा तैयार होने के बाद हर गांव के आवेदन का होगा निस्तारण

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। जमीन देने वाले किसानों के 5 प्रतिशत प्लॉट की मांग का गतिरोध नोएडा प्राधिकरण जल्द दूर करेगा। प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले सभी 81 गांव में जमीन देने वाले किसानों के 5 प्रतिशत प्लॉट का डिजिटल ब्यौरा तैयार करेगा। इसमें किसानों को आवंटित किए गए प्लॉट, शेष पात्र किसान और आवंटन नहीं होने के कारणों की भी जानकारी रहेगी।
इसी डाटा के आधार पर हर गांव में किसान कोटे के बचे प्लॉट का आवंटन कर देनदारी खत्म की जाएगी। इसकी शुरुआत में सात गांव के किसान कोटे का प्लॉट का डिजिटल ब्यौरा तैयार किया गया है। इस आंकड़ें का मिलान भी भू-लेख विभाग से किया जा रहा है। मौजूदा समय में 5 प्रतिशत किसान कोटे के प्लॉट का कोई भी व्यवस्थित ब्यौरा प्राधिकरण में नहीं है। किसान अपने प्लॉट के लिए भू-लेख, नियोजन, इंजीनियरिंग विभाग के चक्कर काटते रहते हैं। कभी फाइल न मिलने तो कभी आपत्ति दर्ज होने की जानकारी देकर प्राधिकरण के कर्मचरियों पर भी टालमटोल का आरोप लगता रहता है। फाइन अगर मिल भी जाए तो किसान पात्र है या नहीं इस संशय को दूर करने में होने वाला सत्यापन महीनों में पूरा हो पाता है। कई बिचौलिये और प्रापर्टी डीलर भी इन प्लॉट को लेकर सक्रिय होने की सूचना अधिकारियों तक पहुंचती रहती है।
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दूसरी तरफ प्राधिकरण पर इन प्लॉट को लेकर किसान संगठन भी लगातार दबाव बनाते रहते हैं। प्रत्येक वर्ष महीनों किसानों का धरना प्रदर्शन प्राधिकरण दफ्तर के बाहर चलता है। प्राधिकरण का पक्ष रहता है कि किसानों को प्लॉट दिए जा रहे हैं वहीं किसानों का पक्ष रहता है कि उनको उनके ही प्लॉट के लिए प्राधिकरण भटका रहा है।



2 हजार से ज्यादा प्लॉट दिए जाने शेष

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण से किसान कोटे के 2 हजार से ज्यादा प्लॉट दिए जाने शेष हैं। इनमें अतिक्रमण की आपत्ति, कोर्ट केस और बिना विवाद के प्लॉट भी शामिल हैं। प्लॉट देने की दिशा में प्राधिकरण ने सेक्टर-146 में ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट का भू-उपयोग बदल कर 200 से ज्यादा प्लॉट निकाले गए हैं।



5 प्रतिशत प्लॉट और अतिक्रमण की आपत्ति

नोएडा प्राधिकरण जिन किसानों से आपसी समझौते के आधार पर जमीन लेता है उस जमीन के सापेक्ष 5 प्रतिशत का आवासीय प्लॉट किसान को मिलता है। शर्त यह भी होती है कि अपनी जमीन पर किसान का कोई अतिक्रमण या निर्माण नहीं हो। कई प्रकरण में यह बात सामने आई है कि जमीन बचाने को घेर ली जाती है। अगर किसान ने पूरी जमीन नहीं छोड़ी होती है या प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में उसका निर्माण होता है तो प्राधिकरण उसे अतिक्रमण मानता है। इस अतिक्रमण की आपत्ति उस किसान के प्लॉट पर लग जाती है।
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प्राधिकरण क्षेत्र के सभी गांव में जमीन देने वाले किसान, 5 प्रतिशत प्लॉट का आवंटन और शेष पात्र किसान का ब्यौरा डिजिटल रूप में तैयार करवाया जा रहा है। इसके बाद एक-एक गांव का अलग-अलग निस्तारण प्राधिकरण करेगा।- महेंद्र प्रसाद, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।
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