माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिस मामले में किशोरी के अपहरण और लैंगिक उत्पीड़न के आरोप लगे थे, अदालत में उसकी कहानी ही अभियोजन के दावे से अलग निकली। किशोरी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। उम्र 18 वर्ष से कम होने का ठोस प्रमाण भी पेश नहीं हो सका। गवाहों के बयानों में अभियोजन का साथ न मिलने पर सत्र अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल निवासी आरोपी के खिलाफ थाना सेक्टर-24 में 2021 में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
अभियोजन के अनुसार 8 मार्च 2021 को दोपहर एक किशोरी घर से गई और वापस नहीं लौटी। अगले दिन उसकी मां ने थाना सेक्टर-24 में तहरीर दी थी। इस पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद 17 अप्रैल 2021 को आरोप पत्र दाखिल किया था। अभियोजन ने चार गवाह पेश किए। पीड़िता ने बयान में कहा कि आरोपी उसका पड़ोसी था और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। वह खुद फोन कर उसे घूमने के लिए बुलाकर गई थी। दोनों बस से आगरा, फिर हरिद्वार और ऋषिकेश गए, जहां पुलिस ने उन्हें पकड़ा। आरोपी ने उससे कोई छेड़छाड़ या शारीरिक संबंध नहीं बनाया। वहीं मां ने जिरह में माना कि बेटी लौटकर बोली थी कि वह अपनी मर्जी से गई थी।
अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से कम की थी। इसी आधार पर पॉक्सो एक्ट की धारा लागू नहीं मानी गईं। अभियोजन का कोई गवाह उसकी कहानी के साथ खड़ा नहीं हुआ। संदेह का लाभ देकर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।