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Noida News: अधूरे नाले ने बढ़ाई मुसीबत, सड़ते पानी से घंघौला-मायंचा बेहाल

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ग्रेटर नोएडा के कासना ​स्थित  घंघौला व मायंचा गांव का नाला। संवाद
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- 4-5 वर्ष पहले शुरू हुआ था निर्माण, निकासी व्यवस्था पूरी नहीं होने से संक्रमण फैलने का खतरा
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-नाले की साफ-सफाई नहीं होने से स्कूल के बच्चों पर भी पड़ रहा असर, गंदगी से निकलने को मजबूर



संवाद न्यूज एजेंसी



ग्रेटर नोएडा। घंघौला और मायंचा गांव के लोगों के लिए अधूरा नाला अब विकास का नहीं, बल्कि परेशानी का प्रतीक बन गया है। वर्षों पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य अधर में लटका है और गंदे पानी की निकासी न होने से पूरा इलाका बदबू और मच्छरों की चपेट में है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राधिकरण की अनदेखी का खामियाजा उन्हें रोज भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रेनो प्राधिकरण की ओर से इस नाले का निर्माण कार्य करीब चार से पांच वर्ष शुरू किया गया था। लेकिन काफी समय बीतने के बाद अभी तक इसको किसी नदी, नहर या अन्य जल निकासी स्रोत से नहीं जोड़ा गया है। जिसके कारण गंदा पानी आगे नहीं बढ़ पाता और लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमा रहता है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण नाले से उठने वाली दुर्गंध पूरे क्षेत्र में फैल जाती है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का नाले के पास से पैदल व वाहन चालकों का गुजरना भी मुश्किल हो गया है।
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उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी के ठहराव के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीण राजेश कुमार का कहना है कि नाले से लगभग 40 से 50 मीटर की दूरी पर एक निजी स्कूल संचालित है। स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को हर दिन दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। करीब 10 से 12 फीट गहरे इस नाले का स्तर सड़क के बराबर है। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से आए दिन वाहन चालक दुर्घटना का शिकार होकर नाले में गिर जाते हैं।

चार से पांच वर्ष पहले नाला बनाया गया था, लेकिन आज तक उसका काम पूरा नहीं हुआ। गंदा पानी यहीं जमा रहता है और पूरे इलाके में बदबू फैलती है। - उपेश आर्य, ग्रामीण

-नाले की नियमित सफाई नहीं होती। मच्छरों की भरमार रहती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर बना रहता है। प्राधिकरण को तत्काल सफाई करनी चाहिए। - बुधपाल, ग्रामीण

घर के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बदबू इतनी तेज होती है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
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- सत्यनारायण भाटी, ग्रामीण

नाले के पास ही निजी स्कूल है, जहां रोज सैकड़ों बच्चे आते हैं। बदबू और गंदगी का सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ रहा है। काफी विद्यार्थियों का स्वास्थ्य खराब होने से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। - दुर्वेश, ग्रामीण

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित  घंघौला व मायंचा गांव का नाला। संवाद

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित  घंघौला व मायंचा गांव का नाला। संवाद

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित  घंघौला व मायंचा गांव का नाला। संवाद

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित  घंघौला व मायंचा गांव का नाला। संवाद

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