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Noida News: चाइल्ड पीजीआई में एक दिन के नवजात की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप

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-सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में जिला अस्पताल से रेफर होकर आया था नवजात
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-परिजनों का आरोप बच्चे को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया था, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं किया गया
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में बृहस्पतिवार की दोपहर तीन बजे एक दिन के नवजात की मौत हो गई। जिला अस्पताल से रेफर होकर आए नवजात की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। 112 नंबर पर शिकायत करके पुलिस से शिकायत की। ऐसे में पुलिस भी मौके पर पहुंची और देर शाम तक मामला शांत हो सका।
सेक्टर 8 निवासी राजा ने बताया कि 16 सितंबर, बुधवार की सुबह 8 बजे पत्नी महक ने सामान्य प्रसव से जिला अस्पताल में नवजात को जन्म दिया था। जन्म के तुरंत बाद ही डॉक्टर ने बच्चे के पेट फूलने की समस्या बताई और सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया। राजा ने बताया कि बुधवार की सुबह ही बच्चे को लेकर चाइल्ड पीजीआई आ गए थे और बच्चे को भर्ती कर लिया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने पेट फूलने की समस्या बताई थी और अल्ट्रासाउंड के लिए ही रेफर किया था। राजा का आरोप है कि 24 घंटे बाद भी डॉक्टरों ने बच्चे का अल्ट्रासाउंड नहीं किया। यही नहीं, परिजनों को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी ऐसे में बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद राजा को बच्चे को देखने की अनुमति मिली थी। राजा ने बताया कि दोपहर 3 बजे से पहले वह बच्चे को देखने गए थे इस समय हालत ठीक थी, लेकिन कुछ देर बाद ही बताया गया कि बच्चे की मौत हो गई है।
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मां ने बच्चे को देखा भी नहीं था : राजा ने बताया कि बच्चे की मां महक अभी जिला अस्पताल में भर्ती है। प्रसव के तुरंत बाद बच्चे को चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया था ऐसे में मां ने बच्चे को देखा भी नहीं था। हमारी हिम्मत नहीं हो रही है कि बच्चे की मां को कैसे बताएं। बच्चे के पिता समेत दादा-दादी और चाचा का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे के इलाज में शुरुआत में पैसे भी खर्च हुए लेकिन बाद में आयुष्मान कार्ड लगने की वजह से निशुल्क इलाज किया गया।
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बच्चे का वेंटिलेटर पर हुआ इलाज : चाइल्ड पीजीआई के नियोनेटोलॉजी विभाग की हेड डॉ. रुचि राय ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद ही बच्चे को इंफेक्शन हो गया था और पेट की समस्या भी थी। गंभीर रूप से बीमार बच्चे को वेंटिलेटर पर रखकर प्रमुखता से इलाज किया गया। बच्चे की हालत के संबंध में परिजनों को सूचित भी किया गया था।
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