फुटपाथ और सेंट्रल वर्ज पर होर्डिंग-यूनिपोल, सड़क पर खतरा
-शहर में विज्ञापन यूनिपोल की बाढ़, वैध-अवैध की कोई पहचान नहीं, सिर्फ प्राधिकरण में विभाग प्रभारी जानते हैं
-1000 से ज्यादा होर्डिंग्स पूरे शहर में लगे, नोएडा प्राधिकरण के रेकार्ड में 217 जगहों पर दी गई विज्ञापन की मंजूरी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में ज्ञापन होर्डिंग और यूनिपोल तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। कौन से यूनिपोल वैध हैं और कौन से अवैध हैं ये देखकर पता नहीं लगाया जा सकता है। प्राधिकरण के बाह्य विज्ञापन विभाग के इंजीनियर सिर्फ पहचान सकते हैं। कागजों में 217 जगहों पर अभी विज्ञापन को मंजूरी दी गई है। लेकिन शहर में 1000 से ज्यादा होर्डिंग्स टंगी हुई हैं। हैरानी की बात यह है कि अब बहुत से यूनिपोल तो फुटपाथ व सेंट्रल वर्ज पर लगा दिए गए हैं। इससे फुटपाथ का रास्ता रुका है साथ ही सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों, पैदल राहगीरों के लिए भी एक खतरा टंग गया है। कभी अगर किसी सड़क का यूनिपोल गिरा तो हादसे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
पैदल चलने के लिए फुटपाथ पर भी यूनिपोल : शहर में कई जगहों पर प्राधिकरण ने फुटपाथ को दुरुस्त रखने की फिक्र नहीं की है। फुट-दो फिट चौड़ा जो फुटपाथ था भी उस पर होर्डिंग-यूनिपोल खड़े करवा दिए गए हैं। सेक्टर-76 आम्रपाली सिलिकॉन सिटी के सामने, स्पेक्ट्रम मॉल सेक्टर-75 के सामने, विश्वकर्मा रोड पर अन्य जगहों पर भी ऐसे यूनिपोल खड़े किए करवाए गए हैं।
यमुना किनारे यूनिपोल की बाढ़, मानक-मंजूरी का पता नहीं : यूनिपोल-होर्डिंग्स की बाढ़ यमुना किनारे दिखती है। यहां कालिंदीकुंज पुल के बीच में जहां तक नजर जाएगी वहां तक यूनिपोल होर्डिंग्स लगी हुई हैं। इसके साथ ही यहां कई जगहों पर भी 50 से ज्यादा यूनिपोल लगे हुए हैं। 2024 में यमुना किनारे के 40 यूनिपोल को लेकर प्राधिकरण में शिकायत हुई थी। अधिकारियों के सामने बाह्य विज्ञापन विभाग ने मंजूरी देने से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन फिर शुरू हुई जांच विज्ञापनों की चकाचौंध में दब गई थी। अब भी यह यूनिपोल वैध हैं या अवैध हैं प्राधिकरण घोषित नहीं कर पाया है।
जर्जर फुट ओवर ब्रिज पर लादा जा रहा होर्डिंग्स का बोझ : सेक्टर-42-50 के बीच का फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) जर्जर हो चुका है। प्राधिकरण के बाह्य विज्ञापन विभाग ने इसे विज्ञापन टांगने के लिए खड़ा कर रखा है। इस पर भारी-भरकम होर्डिंग्स टंगवाई जाती हैं। अब इस एफओबी का हिस्सा तक गिरने लगा है। ऊपर जाने को बनी सीढ़ियों के पत्थर हिल रहे हैं। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
बिल्डरों को भी विज्ञापन का कारोबार करवा रहा विभाग :
नोएडा प्राधिकरण और प्राधिकरण का बाह्य विज्ञापन विभाग दोनों अलग-अलग चल रहे हैं। प्राधिकरण का जो बिल्डर बकाया नहीं जमा कर रहे हैं। प्राधिकरण उनको दूसरा कोई आवंटन नहीं कर रहा है। लेकिन बाह्य विज्ञापन विभाग उन बिल्डर प्लॉट पर विज्ञापन यूनिपोल लगवाने की मंजूरी दे रहा है। वह भी पूरी रकम जमा करवाए बगैर होर्डिंग्स लगवाई जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर सेक्टर-38 के एक प्लॉट पर प्राधिकरण का 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। लेकिन एक करोड़ रुपये के शुल्क पर पिछले दिनों विज्ञापन की मंजूरी विभाग ने दी है। इसमें भी 20 लाख से कम धनराशि ही जमा हुई है। मौके पर भारी-भरकम कई होर्डिंग्स लग गए हैं। इसी तरह सेक्टर-75 में एक बड़े वाणिज्यिक प्लॉट व अन्य बिल्डर प्लॉट पर भी विभाग प्राधिकरण के बकाए की परवाह किए बगैर होर्डिंग्स को मंजूरी दे रहा है।
नोएडा प्राधिकरण के रेकार्ड में शहर में लगे होर्डिंग्स-
यूनिपोल-64
फुट ओवर ब्रिज-31
सार्वजनिक शौचालय-118
अंडरपास-4
सार्वजनिक शौचालय- संचालन के लिए भी प्राधिकरण ने बदले में एजेंसियों को यूनिपोल होर्डिंग्स लगाने की मंजूरी दी है। इनकी संख्या अभी तय नहीं हो पाई है।
आंधी में गिर जाते हैं यूनिपोल और होर्डिंग्स : 5 जून को आई आंधी में शहर में कई जगहों के यूनिपोल होर्डिंग्स गिरे थे। इसमें पर्थला फ्लाईओवर के पास यूनिपोल एक ई-रिक्शा पर गिरा था। बिसरख पुल रोड पर पोल होर्डिंग का भारी-भरकम ढांचा सामने की तरफ सड़क पर गिरा था। सेक्टर-54 ग्रीनबेल्ट के पास प्राधिकरण की तरफ से एजेंसी से लगवाया गए एक यूनिपोल का भी हिस्सा गिरा था। इसके पहले 2 मई 2022 को मॉडल टाउन के आगे एक यूनिपोल कार पर गिरा था।
बाह्य विज्ञापन विभाग की तरफ से जो भी यूनिपोल-होर्डिंग्स लगवाई जाती हैं उनकी स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी का सर्टिफिकेट लिया जाता है। इसके साथ ही निगरानी भी करवाई जाती है।- आर पी सिंह, जीएम, नोएडा प्राधिकरण।