जिला उपभोक्ता आयोग
बीमा कंपनी की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, पांच लाख रुपये क्लेम देने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में आश्रित का नाम शामिल कराने के लिए समय रहते सूचना देने के बावजूद बीमा कंपनी की लापरवाही से नाम छूटने पर इलाज के खर्च का क्लेम देने से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये की क्लेम राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ 30 दिन के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया है।
नोएडा के सेक्टर-6 स्थित एचएमएस इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने भारती एक्सा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से एक फरवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 तक के लिए ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी कराई थी। पॉलिसी के प्लान-1 में दो लाख रुपये और प्लान-2 में पांच लाख रुपये तक के इलाज की सीमा निर्धारित थी। इसके लिए कंपनी ने सात लाख रुपये प्रीमियम का भुगतान किया था।
बीमा कंपनी को भेजी गई सूची में कंपनी के निदेशक आदित्य संधी के पिता केबी संधी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज था। इसके बावजूद बीमा कंपनी की ओर से जारी पॉलिसी में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। इसकी जानकारी मिलने पर कंपनी ने ईमेल और फोन के माध्यम से केबी संधी का नाम शामिल करने का अनुरोध किया, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की गई।
आठ जुलाई 2017 को दिल की बीमारी के चलते केबी संधी को मुंबई स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया। उपचार पर कुल 644977 रुपये खर्च हुए। इसके बाद बीमा कंपनी से क्लेम मांगा गया, लेकिन कंपनी ने भुगतान करने से इंकार कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पॉलिसी जारी करते समय उसे सदस्यों की जो सूची उपलब्ध कराई गई थी, उसमें केबी संधी का नाम नहीं था। दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को पांच लाख रुपये की क्लेम राशि भुगतान करने का आदेश दिया है।