-सोसाइटी में पजेशन के समय फ्लैट मालिकों ने बिल्डर को दिए थे आईएफएमएस फंड के नाम पर रुपये
-सोसाइटी में एओए को हैंडओवर के बाद भी बिल्डर नहीं दे रहे आईएफएमएस के करोड़ों रुपये
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले फ्लैट खरीदारों और बिल्डरों के बीच इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड (आईएफएमएस) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फ्लैट पजेशन मिलने के समय खरीदारों से एडवांस में ली गई करोड़ों रुपये की यह रकम बिल्डरों के खातों में फंसी हुई है, लेकिन अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) को सोसाइटी हैंडओवर के बाद भी एओए के खाते में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सोसाइटियों के कई अधूरे कार्य ठप पड़े हैं और निवासियों को असुविधा हो रही है।
बता दें कि जब भी कोई खरीदार फ्लैट का पजेशन लेता है तो बिल्डर उससे आईएफएमएस के नाम पर एकमुश्त भारी-भरकम राशि वसूलते हैं। यह राशि फ्लैट के साइज के हिसाब से लाखों में होती है। यह इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी फंड होता है जिसे जरूरत के समय सोसाइटी के अधूरे कार्य पूरा करने या इमरजेंसी में उपयोग किया जा सकता है। सोसाइटी के सभी फ्लैट मालिकों से मिलने वाला यह फंड करोड़ों रुपये का हो जाता है। शहर की अधिकतर सोसाइटियों में यह देखने को मिल रहा है कि एओए बनने और हैंडओवर के बाद भी बिल्डर आईएफएमएस का पैसा एओए के खाते में वापस नहीं कर रहा है।
यह है नियम : रियल एस्टेट नियमों और अपार्टमेंट एक्ट के मुताबिक, जैसे ही सोसाइटी के निवासियों की चुनी हुई संस्था एओए का गठन हो जाता है, बिल्डर को यह पूरा फंड ब्याज सहित या नियमानुसार एओए के बैंक खाते में ट्रांसफर करना होता है। इसके बाद सोसाइटी के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निवासियों की होती है।
फंड का गलत इस्तेमाल :
आरोप है कि बिल्डर इस करोड़ों रुपये के फंड का इस्तेमाल अपने दूसरे प्रोजेक्ट को पूरा करने या व्यक्तिगत लाभ के लिए कर रहे हैं।
अधूरे काम और मेंटेनेंस की कमी :
फंड ट्रांसफर न होने के कारण एओए के पास सोसाइटी के रखरखाव जैसे: लिफ्ट, सिक्योरिटी, जेनरेटर, पार्क के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते, जिससे सोसाइटियों की हालत खराब हो रही है।
कोई पारदर्शिता नहीं
: निवासियों को यह भी नहीं पता होता कि उनके द्वारा जमा किए गए पैसे पर कितना ब्याज मिला और वह पैसा इस वक्त किस खाते में हैं।
सोसाइटी में कुल 1470 फ्लैट हैं। हर फ्लैट मालिक से 20-25 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से आईएएएमएस लिया गया था, चार साल बाद भी बिल्डर के पास आईएफएमएस का करीब 5-6 करोड़ रुपये बकाया है, लेकिन बिल्डर ने अबतक नहीं दिया है।
-पुनीत धनखड़, पूर्व एओए सचिव, गार्डेनिया एम्स ग्लोरी सेक्टर 46
सोसाइटी में कुल 1800 फ्लैट हैं और यहां पर 2019 में एओए बन गई थी लेकिन 2013 में हैंडओवर हुआ था। इस दौरान बिल्डर को आईएफएमएस का 6.25 करोड़ रुपया भी देना था लेकिन बिल्डर ने नहीं दिया। -अभिनव सैनी, एओए सचिव, ग्रैंड अजनारा हेरिटेज सेक्टर 74
सोसाइटी में कुल 5038 फ्लैट हैं और 2019 में एओए बनी थी। एओए की याचिका के बाद एनसीएलएटी के आदेश पर 2024 में एओए को सोसाइटी हैंडओवर हो गई है लेकिन आईएफएमएस का 110 करोड़ रुपया नहीं मिला है। कई कार्य अधूरे हैं जिन्हें पूरा करवाना बहुत जरूरी है।
-अरुण शर्मा, पूर्व एओए अध्यक्ष व वर्तमान सदस्य, केपटाउन सेक्टर 74
सोसाइटी में कुल 1800 फ्लैट हैं और यहां पर 2016 में एओए बनी थी और 2019 में हैंडओवर हुआ था। आज सात साल बाद भी बिल्डर ने आईएफएमएस का पूरा भुगतान नहीं किया है। बिल्डर पर आईएफएमएस का 2.14 करोड़ और ब्याज बकाया है।
-नितेश रंजन, एओए अध्यक्ष, प्रतीक विस्टीरिया सेक्टर 77