- अदालत ने कहा, मामला सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं, संगठित आर्थिक अपराध से जुड़ा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की फर्जी भूखंड योजना के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के मामले में अदालत ने आरोपी अमनप्रीत सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपी के खिलाफ थाना फेज-1 नोएडा में प्राथमिकी दर्ज है। अभियोजन के अनुसार वादी अंकित शर्मा ने 21 मार्च 2025 को मधुर सहगल, अर्चना थापा और अमनप्रीत सिंह के खिलाफ तहरीर दी थी। उनका आरोप है कि उनकी पत्नी विधि शर्मा ने जुलाई 2021 में यमुना प्राधिकरण की प्लॉट योजना के नाम पर बनी वेबसाइट पर पंजीकरण कराया था।
वादी ने पत्नी और माता के नाम 150-150 गज के दो प्लॉट के लिए 15-15 हजार रुपये, कुल 30 हजार रुपये ऑनलाइन जमा किए। 29 जुलाई 2021 को लकी ड्रा का नतीजा आया, जिसमें विधि शर्मा के नाम प्लॉट निकलने की सूचना मिली। अगले दिन वादी सेक्टर 4 स्थित ट्रस्टार इंफ्रासोल प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पहुंचे। वहां कथित रूप से मधुर सहगल, अर्चना थापा और अमनप्रीत सिंह ने आवंटन की बधाई दी। उन्होंने एक साल में सात किस्तों में कुल 24 लाख रुपये जमा करने को कहा और भुगतान के बाद कब्जा देने का वादा किया। वादी ने पांच किस्तों में एनईएफटी के जरिये कुल 18,03,750 रुपये कंपनी के खाते में जमा किए। बाद में प्राधिकरण कार्यालय जाने पर पता चला कि प्राधिकरण ने पीपीपी मॉडल के तहत इस कंपनी के साथ कोई योजना जारी ही नहीं की थी। वहीं अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को राहत देने से मना कर दिया।