-बिल्डर की ओर से 54 लाख की देनदारी न होने के कारण फंसा है गंगा जल का पानी
-बोरवेल और पानी खरीदकर चला रहे काम, 497 फ्लैट में रह रहे हैं करीब दो हजार लोग
माई सिटी रिपोर्टर
नोेएडा। शहर की सबसे ऊंची इमारत सुपरनोवा आधुनिक जीवन का प्रतीक हैं। लेकिन यहां के निवासी एक बुनियादी जरूरत के लिए पिछले एक साल से परेशान हैं। 300 मीटर ऊंची इस सोसाइटी के 497 फ्लैटों में रहने वाले करीब 2000 लोग पानी जैसी मूलभूत सुविधा के संघर्ष कर रहे हैं। यहां के निवासी बोतलबंद सप्लाई और बोरवेल पर निर्भर होकर दिन काट रहे हैं। चमक-दमक के पीछे छिपी यह जमीनी सच्चाई अब एक बड़े सवाल को जन्म दे रही है, क्या विकास की ऊंचाई, बुनियादी सुविधाओं की गहराई से बड़ी हो सकती है।
सेक्टर 94 स्थित सुपरनोवा सोसाइटी पिछले एक सालों से गंगाजल को तरस रही है। एओए अध्यक्ष पल्लवी कौशिक ने बताया कि बिल्डर ने गंगा जल का करीब 45 लाख रुपये बकाया नोएडा प्राधिकरण को जमा नहीं किया है। इसके चलते पिछले एक साल से उन्हें गंगा जल की सप्लाई नहीं मिल रही है। ऐसे में सोसाइटी निवासियों को बोरवेल के खारे व खराब गुणवत्ता वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसे बेहतर करने के लिए एओए को सॉ़फ्टनर और फिल्टर का खर्च उठाना पड़ रहा है। जबकि अन्य सोसाइटियों में प्राधिकरण गंगा जल की आपूर्ति करती है। जो बोरवेल का पानी उपयोग नहीं करते, वह बाहर से पानी खरीदकर उपयोग कर रहे हैं, जो कि आमतौर पर काफी महंगा पड़ रहा है।
उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण से इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल रहा है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना पूरी करने और बकाये पूरे करने के निर्देश पहले ही दे दिए हैं। ऐसे में निवासियों को उम्मीद है कि बकाया जल्द जमा हो जाएगा, जिसके बाद उन्हें राहत मिल सकेगी और गंगा जल की आपूर्ति होगी, लेकिन असल में नोेएडा प्राधिकरण की ओर से लेट लतीफी होने के कारण निवासियों को पानी के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
हमारे यहां पिछले एक साल से गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो रही है, बिल्डर ने बकाया पैसा प्राधिकरण को नहीं दिया, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई।
-पल्लवी कौशिक, एओए अध्यक्ष
हम अब बाहर से पानी खरीदकर पीते हैं, जो कि अपेक्षाकृत महंगा पड़ता है, लंबे समय तक खरीदकर पानी नहीं पिया जा सकता है।
-नरेश नंदवानी, एओए सलाहकार
आलम यह है कि बोरवेल का पानी खारा और गुणवत्ता में भी खराब होता है, जिसका उपयोग करना मुश्किल है।
प्रीती अहूजा
बोरवेल की गुणवत्ता भी बेहद खराब है जिसके बड़े फिल्टर और सॉफ्टनर का खर्च भी लंबा आता है, जो कि एओए को वहन करना पड़ता है।
-फराहन