- 920 नकली नोट बरामद, चार आरोपी गिरफ्तार, सरगना अब भी फरार
- नॉलेज पार्क पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा
- 1.84 लाख रुपये के जाली नोट और बिना नंबर प्लेट की कार बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अयोध्या जेल में बंद रहने के दौरान हुई मुलाकात के बाद जाली नोटों का गोरखधंधा शुरू करने का मामला सामने आया है। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने जाली भारतीय करेंसी तैयार करने और उसे बाजार में खपाने वाले गिरोह के चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुल्तानपुर के ग्वाडिया निवासी अर्जुन सिंह (22), अयोध्या के हैदरगंज निवासी शशांक गुप्ता (19), सीतापुर के हरिहरपुर निवासी शान्तनु सिंह (19) और अयोध्या के टंडौली निवासी वैभव शुक्ला (19) के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से 200-200 रुपये के 920 जाली नोट बरामद किए हैं। इनकी कुल अंकित कीमत 1.84 लाख रुपये है। इसके अलावा एक हजार रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल की जा रही बिना नंबर प्लेट की स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की गई है। गिरोह का सरगना कुबेर सिंह अभी फरार है।
डीसीपी ग्रेटर नोएडा श्रवण सिंह ने बताया कि शुक्रवार को गोपनीय सूचना और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर गढ़ी समस्तीपुर जाने वाले रास्ते पर गांव कोंडली पुस्ता के पास घेराबंदी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में जाली नोट तैयार करने और उन्हें असली बताकर लोगों को ठगने के तरीके का पता चला है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल अर्जुन सिंह वर्ष 2024 में अयोध्या जेल में बंद था। वहां उसकी मुलाकात कुबेर सिंह से हुई थी। कुबेर सिंह पहले भी जाली नोट छापने के मामले में जेल में बंद था। अर्जुन ने जेल में रहते हुए उससे जाली नोट तैयार करने का तरीका सीखा और दोनों ने बाहर आने के बाद इस कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना बनाई।
जेल से बाहर आने के बाद अर्जुन ने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर जाली नोट तैयार करने और उन्हें बाजार में चलाने का काम शुरू किया। नोटों की छपाई के लिए प्रिंटर का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर जाली नोट खपाने की कोशिश करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नोट कहां छापे जाते थे और इस काम में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
दो लाख के बदले पांच लाख नकली नोट देने का झांसाः कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि गिरोह लोगों को कम समय में अधिक रुपये कमाने का लालच देता था। आरोपियों की ओर से दो लाख रुपये के असली नोटों के बदले पांच लाख रुपये के जाली नोट देने का झांसा दिया जाता था। इस तरह असली करेंसी हासिल कर गिरोह के सदस्य मुनाफा कमाने की कोशिश करते थे। आरोपी नकली नोट आसानी से पकड़ में न आएं, इसके लिए शाम के समय भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों पर उन्हें खपाने की कोशिश करते थे। कारोबार से मिलने वाली रकम को आपस में बांट लिया जाता था। चारों आरोपी ग्रेटर नोएडा में भी जाली नोट चलाने के इरादे से आए थे।
आठवीं पास है सरगना, सदस्य बीकॉम, एलएलबी और बीसीए के छात्र : अर्जुन आठवीं पास है। शशांक बीकॉम अंतिम वर्ष, शान्तनु बीए-एलएलबी द्वितीय वर्ष और वैभव बीसीए अंतिम वर्ष का छात्र है। पुलिस ने इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है। कुछ आरोपियों के खिलाफ अयोध्या के कैंट थाने में पहले से मुकदमे दर्ज हैं।