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Noida News: बॉस बनकर भेजा व्हाट्स एप मैसेज, कंपनी के अकाउंटेंट से 75 लाख की ठगी

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- बॉस बनकर भेजा व्हाट्स एप मैसेज, कंपनी के अकाउंटेंट से 75 लाख की ठगी
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- साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज, पुलिस कर रही मामले की जांच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-8 की एक कंपनी में कामकाज हर दिन की तरह सामान्य चल रहा था। तभी अकाउंटेंट के मोबाइल पर कंपनी के मालिक के नाम से एक व्हाटसएप संदेश आया। संदेश में तत्काल एक खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करने का निर्देश था। अकाउंटेंट ने बिना किसी संदेह के आरटीजीएस के जरिए 75 लाख रुपये भेज दिए। कुछ देर बाद जब असली मालिक से बात हुई तो पता चला कि यह आदेश नहीं, बल्कि साइबर ठगों का बिछाया हुआ 'बॉस स्कैम' था और कंपनी लाखों रुपये की ठगी का शिकार हो चुकी थी।
सेक्टर-8 निवासी हुसैन अरशद खान एक निजी पेपर पैकेजिंग कंपनी में अकाउंटेंट हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत की है कि 24 जून को उनके मोबाइल से छेड़छाड़ कर साइबर ठगों ने कंपनी के मालिक मोहम्मद साजिद के नाम और प्रोफाइल का इस्तेमाल करते हुए व्हाट्स एप पर मैसेज भेजा। मैसेज में तत्काल एक बैंक खाते में 75 लाख रुपये आरटीजीएस करने का निर्देश दिया गया। चूंकि संदेश मालिक के नाम से आया था और भुगतान को अत्यंत जरूरी बताया गया था, इसलिए उन्होंने बिना किसी संदेह के कंपनी के एचडीएफसी बैंक खाते से इंडसइंड बैंक के एक खाते में पूरी रकम स्थानांतरित कर दी। कुछ समय बाद जब उन्होंने भुगतान की जानकारी कंपनी के मालिक से साझा की, तब पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था।
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इसके बाद मामले की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराई गई और साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि ठग अब तकनीक के साथ सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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क्या है बॉस स्कैम : बॉस स्कैम साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी किसी कंपनी के मालिक, निदेशक या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग कर कर्मचारी, विशेषकर अकाउंटेंट या फाइनेंस टीम को तत्काल भुगतान करने का निर्देश देते हैं। अक्सर संदेश में गोपनीयता और जल्दबाजी का दबाव बनाया जाता है, जिससे कर्मचारी बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर कर देता है।

बचाव के आसान उपाय
- केवल व्हाट्सऐप या ईमेल के आधार पर बड़ी रकम कभी ट्रांसफर न करें।
- भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी से फोन या वीडियो कॉल पर पुष्टि अवश्य करें।
- कंपनी में बड़े भुगतान के लिए टू-स्टेप अप्रूवल (दो अधिकारियों की मंजूरी) की व्यवस्था रखें।
- व्हाट्सऐप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन और मोबाइल की सुरक्षा सेटिंग्स सक्रिय रखें।
- किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी तुरंत बैंक और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
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