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Noida News: 12 किमी के दायरे में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने स्टीमर से चलाया सर्च ऑपरेशन

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फोटो
-दूसरे दिन भी नहीं मिली सफलता, युसुफपुर चक के पास नाव में रस्सी बांधते समय हुआ था हादसा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली क्षेत्र में युसुफपुर चक गांव के पास हिंडन नदी में नाव में रस्सी बांधने के दौरान डूबे दो युवकों को दूसरे दिन भी पता नहीं चला। एनडीआरएफ के साथ एसडीआर की टीम ने करीब 12 किमी के दायरे में स्टीमर की मदद से दोनों युवकों को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल सका है।
पुलिस के मुताबिक डूबे युवकों की पहचान शिव राजपूत (19) निवासी गांव हाजीपुर, थाना स्याना बुलंदशहर और सौरव (20) निवासी गांव बिजलीपुर थाना खुर्जा बुलंदशहर के रूप में हुई है। दोनों युवक वर्तमान में यूसुफपुर चक गांव में किराये के मकान में परिवार के साथ रहते थे। दोनों नाव दिहाड़ी काम करते थे।
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बहलोलपुर और यूसुफपुर चक के बीच हिंडन नदी में शनिवार शाम नाव संचालन से जुड़े एक व्यक्ति ने बुलंदशहर निवासी शिव राजपूत को 500 रुपये का लालच देकर नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक रस्सी बांधने के लिए भेजा था। रस्सी बांधने के लिए शिव पानी में उतरा। इसी दौरान वह नदी के गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे डूबता देखकर वहां मौजूद उसका दोस्त सौरव (20) निवासी बुलंदशर दूसके युवक को बचाने के लिए पानी में उतर गया, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण वह भी डूब गया। जानकारी मिलने पर रेस्क्यू टीमों ने स्टीमर के साथ नदी के आसपास के हिस्से में तलाश अभियान चलाया था। कोतवाली प्रभारी रंजीत सिंह का कहना है कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम चार स्टीमर के सहारे युवकों की तलाश में लगी है।

रोज 5 से 6 हजार लोग करते हैं आवाजाही :
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हैबतपुर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग यहां काम करने आते हैं। इन दोनों इलाकों के बीच से हिंडन नदी गुजर रही है। नदी पार करने के लिए गौड़ चौक के पास पुल है, लेकिन यह थोड़ा दूर है। ऐसे में इन इलाकों के लोग सेक्टर-63 में बहलोलपुर के पास नावों से नदी पार करते हैं। यहां पिछले आठ सालों से पांच से सात नाव चल रही हैं। एक अनुमान के अनुसार रोज दो हजार से अधिक लोग नाव से सफर करते हैं।
इस समय हिंडन का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। ऑटो या ई रिक्शा से आने जाने पर 70 रुपये किराये के साथ जाम लगने पर डेढ़ घंटे का समय लगता है। वहीं हिंडन नदी से नाव के सहारे 10 रुपये देकर 2 मिनट में उस पार पहुंच जाते हैं। इस कारण लोग नाव को तवज्जों देते हैं।
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नाव का संचालन करने वालों के पास लाइसेंस और लाइफ जैकेट नहीं : नियमानुसार व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लकड़ी वाली चप्पू की नाव को लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए लाइसेंस आवश्यक है। जल परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस जारी होता है। नाव चलाने वालों को सुरक्षा उपायों की जानकारी होनी चाहिए। लाइफ जैकेट भी होनी चाहिए। नाव के साइज के हिसाब से 12 सवारियों की क्षमता है, लेकिन यहां इससे अधिक सवारियां ढोई जा रही हैं।
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