- वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण शासन स्तर पर लिया है सप्ताह में दो दिन के वर्क फ्राॅम होम का फैसला
- औद्योगिक सेक्टर स्पष्ट नहीं होने से परेशान उद्यमी, कहा मैन्यूफेक्चरिंग उद्योग में नहीं होगा यह संभव
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शासन स्तर पर सप्ताह में दो दिन वर्क फ्राॅम होम करने का फैसला लिया गया है, लेकिन अभी इसका आदेश जिला स्तर पर नहीं पहुंचा है। प्रशासन आदेश आने का इंतजार कर रहा है। अफसरों का कहना है कि आदेश आने के बाद वर्क फ्रॉम होम और अलग-अलग शिफ्ट में कार्यालय खोलने की व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर के उद्यमियों ने इसका विरोध किया है।
खाड़ी देशों में युद्ध के हालात से पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत चल रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने तेल बचाने की अपील की है। निजी वाहनों का प्रयोग कम से कम करने की अपील की है। इसी दिशा में शनिवार को लखनऊ में श्रम विभाग की उच्च स्तरीय बैठक हुई। जिसमें फैसला लिया गया कि बड़े-बड़े संस्थान और औद्योगिक इकाइयों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्राॅम होम व्यवस्था लागू होगी। साथ ही कार्यालयों के समय अलग-अलग शिफ्टों में विभाजित करने और सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। यह आदेश प्रदेश में लागू कर दिया गया, लेकिन अभी तक जिला स्तर पर इसका आदेश नहीं पहुंचा है। अफसरों का कहना है कि आईटी सेक्टर की काफी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम किया है। उप श्रम आयुक्त राकेश द्विवेदी का कहना है कि आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
मैन्यूफेक्चरिंग उद्योग में संभव नहीं वर्क फ्राॅम होम : आईबीए के अध्यक्ष अमित उपाध्याय का कहना है कि युद्ध के कारण उद्योग जगत पहले ही काफी मुश्किलों का सामना कर रहा है। श्रमिकों का वेतन बढ़ने से लेकर ईंधन की कीमतों में वृद्धि से परेशान हैं। कच्चे माल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। खरीदार दरों में इजाफा नहीं कर रहे है। अब वर्क फ्राॅम होम थोपना सहीं नहीं होगा। मैन्यूफेक्चरिंग उद्योग में यह संभव नहीं है।