संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग एवं भजन संकीर्तन का आयोजन किया गया। साध्वी सुमान्या भारती ने श्रद्धालुओं को गुरु की महिमा बताई। साथ ही भजनों का गायन करके संगत को कृतार्थ किया।
उन्होंने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यदि कोई चित्र व मूर्ति बड़ी सुंदर बनी हुई दिखाई देती है तो कदाचित उसके पीछे किसी चित्रकार अथवा मूर्तिकार का परिश्रम एवं समय लगा हुआ है। इसी प्रकार संपूर्ण विश्व में जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं, उनके सजे संवरे व्यक्तित्व के पीछे ऐसी गुरु सत्ता को खड़ा पाएंगे, जिसने उस साधारण व्यक्ति के ऊपर अपना समय, तप, त्याग और परिश्रम लगाकर उसे महान व्यक्तित्व में परिवर्तित किया है।
यह गुरु की महिमा है कि गुरु सदैव पर्दे के पीछे रहते हुए भी शिष्य के जीवन की बागडोर पूर्ण रूप से संभालते हैं। किंतु संसार के उत्थान के लिए सबसे बड़ा योगदान देने के बावजूद भी गुरु स्वयं पीछे रह कर अपने शिष्य को पूर्ण रूप से श्रेय दिलाते हैं। गुरु माता की तरह होता है जो अपने बालक को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संसार की हर विपदा से बचाने के लिए तत्पर रहती है। गुरु पिता की तरह भी है जो स्वयं कष्ट सहते हुए अपनी संतान के पास एक गर्म हवा का झोंका भी नहीं आने देता।
गुरु उस सखा की तरह है जो हमें बार-बार हाथ पकड़ कर पतन की गहराइयों से उठाकर आध्यात्मिक उत्थान की सीढ़ियों पर चढ़ाते हैं। गुरु उस बंधु की तरह हैं जो बिना कहे सर्वज्ञ होकर अपने शिष्य के दुख सुख में संग रहते हुए उसके हिस्से का दुख व कष्ट भी सहते हैं। निराकार पारब्रह्म परमात्मा जब साकार स्वरूप धारण करके गुरु रूप में धरा पर आता है तो उसका सामर्थ्य कई गुणा अधिक होता है। वे अपने शिष्य के संचित कर्म काटकर उसकी पीड़ा को कम करके उसे सदा के लिए जीवन मुक्ति का आनंद प्रदान करते हैं। उनके लिए किसी को फर्श से उठाकर अर्श तक ले जाना क्षण भर की बात है।
उन्होंने कहा कि ये क्षण केवल उन्हीं परम सौभाग्यशाली जीवात्माओं को प्राप्त होते हैं जो पूर्ण समर्पण भाव के द्वारा निरंतर गुरु आज्ञा में रहते हुए अपने जीवन को पूर्ण रूप से पवित्र बना लेती हैं। गुरु अपनी दिव्य दृष्टि से शिष्य के व्यक्तित्व, व्यवहार एवं आचरण को भी दिव्य बना देते हैं किंतु शिष्य की दिव्यता स्थाई तभी रह पाती है। जब वह निरंतर ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना से आत्म साक्षात्कार करके गुरु को केवल एक मानव शरीर में बंधी हुई शक्ति नहीं अपितु अखिल ब्रह्मांड नायक के रूप में वरण करें।
प्रवचन करतीं साध्वी सुमान्या भारती व अन्य। प्रवक्ता