रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) मशीन लगाने को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने मुख्यालय को एक बार फिर डिमांड भेज दिया है। ब्लड बैंक में एसडीपी मशीन की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह मशीन उपलब्ध होने पर गंभीर मरीजों को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने में काफी आसानी होगी।
एसडीपी मशीन की तकनीक के तहत रक्तदाता से ब्लड लेकर विशेष प्रक्रिया के माध्यम से सिर्फ प्लेटलेट्स एक घंटे में निकाल लिए जाते हैं, जबकि बाकी ब्लड तुरंत ही शरीर में वापस भेज दिया जाता है। यह प्रक्रिया सुरक्षित मानी जाती है और रक्तदाता 72 घंटे बाद दोबारा प्लेटलेट्स देने के लिए सक्षम हो जाता है। इस विधि से निकाली गई प्लेटलेट्स को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स कहा जाता है। एक यूनिट एसडीपी चढ़ाने पर मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 50–60 हजार तक बढ़ जाता है।
वहीं वर्तमान में ब्लड बैंक में रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी) विधि का उपयोग किया जाता है। इसमें सेपरेटर यूनिट के जरिये प्लेटलेट्स निकालने में छह घंटे तक लग जाते हैं। एक बार रक्तदान करने के बाद व्यक्ति को तीन माह बाद ही दोबारा रक्तदान करने की अनुमति मिलती है। आरडीपी की एक यूनिट चढ़ाने पर मरीज का प्लेटलेट्स काउंट केवल लगभग पांच हजार बढ़ता है, जिसके चलते कई यूनिट चढ़ानी पड़ती हैं और रिएक्शन का खतरा भी अधिक रहता है।
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. संदीप यादव ने बताया कि एसडीपी विधि में एक ही डोनर से प्लेटलेट्स मिलने की वजह से ट्रांसफ्यूजन से होने वाली बीमारियों का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है। प्लेटलेट्स का सरवाइवल भी बेहतर रहता है। डेंगू जैसी बीमारियों में यह तकनीक मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है, क्योंकि प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं।
-
वर्जन
पिछले साल भी एसडीपी मशीन की डिमांड मुख्यालय को भेजी गई थी लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। अगर मशीन उपलब्ध होती तो डेंगू से प्रभावित मरीजों में प्लेटलेट्स रिकवरी और तेज हो सकती थी।
डॉ. संदीप यादव, इंचार्ज, ब्लड बैंक, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।