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संशोधित : अब 2025-26 तक क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमफिल कर सकेंगे छात्र

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-दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में मिली प्रस्ताव को मंजूरी
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-दिव्यांग अभ्यर्थियों को पीएचडी में प्रवेश को शुल्क में मिलेगी 75 फीसदी की छूट

-बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए डीयू का 1717.45 करोड़ का बजट पारित

-कोविड पीड़ितों को डिग्री पूरी करने के लिए मिलेगा विशेष अवसर

-एक विषय में 10 अंकों के विशेष मॉडरेशन का किया गया प्रावधान

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। अब छात्र क्लिनिकल साइकोलॉजी और मनोरोग सामाजिक कार्य में शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक एमफिल कर सकेंगे। डीयू की कार्यकारी परिषद ने दो सालों तक इन कार्यक्रमों में एमफिल जारी रखने के फैसले को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसी तरह डीयू में चिकित्सा में एमफिल की वैधता को बढ़ा दिया गया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को अब पीएचडी में प्रवेश के लिए कुल शुल्क में 75 फीसदी की छूट मिलेगी। इसके साथ ही कोविड पीड़ितों को डिग्री पूरी करने के लिए एक विशेष अवसर प्रदान किया जाएगा। कोई कोर्स पूर्ण करने के लिए एक विषय में 10 अंकों के विशेष मॉडरेशन का प्रावधान किया गया है। डीयू की कार्यकारी परिषद ने शुक्रवार को इन प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है।

डीयू में शुक्रवार को कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक हुई। कुलपति प्रो योगेश सिंह की की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय का 1717.45 करोड़ रुपये का बजट भी पारित कर दिया गया। पारित बजट अनुमान के अनुसार सैलरी मद में कुल 553.95 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसके अनुसार रेगुलर फैकल्टी सैलरी के तहत 307.32 करोड़ और रेगुलर नॉन फैकल्टी सैलरी के लिए 123.68 करोड़ रुपए तथा अन्य विषयों जैसे कि लीव एनकैशमेंट, एलटीसी, बच्चों की शिक्षा के लिए भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और अन्य सेवानिवृति लाभ आदि के लिए 122.95 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक रिक्त पदों के खर्च को भी बजट में शामिल किया गया है। इसके तहत 935.26 करोड़ रुपये का अनुमान पेश किया गया है।
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2025-26 तक एमफिल जारी रखने को मंजूरी

चिकित्सा में एमफिल की वैधता बढ़ाते हुए क्लिनिकल साइकोलॉजी और मनोरोग सामाजिक कार्य में शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक एमफिल जारी रखने को भी परिषद ने मंजूरी दी है। कुलपति प्रो योगेश सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में नैदानिक मनोवैज्ञानिकों और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह आंशिक छूट दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसा के अनुरूप अन्य विषयों में दिल्ली विश्वविद्यालय में एमफिल को बंद किया जा चुका है।
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एक विषय में 10 अंकों के विशेष मॉडरेशन का प्रावधान

जिन विद्यार्थियों का कोर्स पूरा करने के लिए एक पेपर शेष रहता है, उन्हें 10 अंकों का विशेष मॉडरेशन दिया जाएगा। परिषद की बैठक में इस पर भी मुहर लगा दी गई है। परिषद की ओर से यह फैसला 30 नंवबर 2023 को आयोजित हुई डीयू की अकादमिक परिषद(एसी) की बैठक में की गई सिफारिशों पर विचार के बाद लिया गया है। कुलपति प्रो योगेश सिंह ने बताया कि विवि में डिग्री कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए एक निर्दिष्ट अवधि का प्रावधान है, जिसके भीतर विद्यार्थियों को अपनी डिग्री पूरी करनी होती है। जो विद्यार्थी निर्दिष्ट अवधि में अपना डिग्री पाठ्यक्रम पूरा करने में असमर्थ रहते हैं, एनईपी यूजीसीएफ. 2022 के कार्यान्वयन के साथ अब उन विद्यार्थियों के लिए कुछ राहत के प्रावधान उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में वे नियमानुसार प्रमाणपत्र या डिप्लोमा प्राप्त करने के पात्र हैं। भले ही वे पूर्ण डिग्री कार्यक्रम पूरा करने में असफल रहते हों। इसके अलावा डिग्री पूरी करने के लिए सात साल की अवधि प्रदान की जाती है।
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विदेशी विवि से पीएचडी करने के लिए नियम तय

विदेशी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने के इच्छुक दिल्ली विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों को अध्ययन अवकाश देने के दिशा निर्देशों को भी ईसी की बैठक में मंजूरी दी गई है। दिशा निर्देश बनाने के लिए गठित कमेटी की अनुशंसा के अनुसार गैर-पीएचडी वाले संकाय सदस्य जिस विदेशी विश्वविद्यालय से पीएचडी करना चाहते हैं उस विश्वविद्यालय की क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग दिल्ली विश्वविद्यालय से कम नहीं होनी चाहिए। संकाय सदस्य को आवेदन में वजीफा-फैलोशिप के प्रकार और राशि के बारे में भी बताना होगा। संकाय सदस्य का वेतन डीयू के मौजूदा नियमों के अनुसार तय किया जाएगा।
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