किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रूपेश वर्मा ने कहा कि देश के लोकतंत्र पर तीन स्तरों पर हमला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में वोट चोरी के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वहीं, चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाने वालों को नजरबंद कर विरोध की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से नागरिकों के बोलने, शांतिपूर्ण विरोध करने और अपनी बात रखने के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति और विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि किसान सभा और किसान एकता संघ सरकार की नीतियों तथा पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए मांग की कि किसान नेताओं और सभी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नजरबंदी तत्काल समाप्त की जाए तथा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सुनिश्चित किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके विरुद्ध महाभियोग की मांग उठाई। इसके अलावा, किसान नेताओं एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नजरबंदी तत्काल समाप्त करने और कथित पुलिस दमन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान नर्मदा गेट के सामने पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी खींचतान हुई। पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को दिल्ली जाने से रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें उठाते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में पूर्व बार अध्यक्ष जगतपाल भाटी, बुधपाल यादव, शिशांत भाटी, गुरप्रीत एडवोकेट, राहुल नागर, निशांत रावल, भोजराज रावल, सुशील सुनपुरा, सुधीर रावल, नरेश नगर, लाल नगर, विनोद नगर, कृष्ण यादव, पदम यादव, सुले यादव और उम्मेद त्यागी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।