मारपीट की नौबत आने पर पीठासीन अधिकारी ने अनिश्चितकाल के लिए बैठक स्थगित की
सदन में भाजपा और आप पार्षदों में टकराव, जमकर हुई नारेबाजी, गालियां देने का आरोप
मेयर चुनाव कराने के लिए रात 7:45 बजे तक आप पार्षदों और सांसदों ने दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के सदन में भाजपा व आम आदमी पार्टी के बीच टकराव का सिलसिला जारी रहने से मंगलवार को भी महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के छह सदस्यों का चुनाव नहीं हो सका। पार्षदों के शपथ ग्रहण के बाद दोनों पक्षों की ओर से हुई नारेबाजी, एक-दूसरे पर गाली देने के लग रहे आरोपों व मारपीट की नौबत आने पर पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने अनिश्चितकालीन समय के लिए बैठक स्थगित कर दी। इस दौरान दोनों पक्षों के कुछ पार्षद सीटों पर भी चढ़ गए थे। उधर, सदन स्थगित होने के बाद भाजपा पार्षद बाहर निकल गए, लेकिन आप पार्षद, विधायक व सांसद सदन के अंदर महापौर के चुनाव की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए। रात करीब 7:45 बजे धरना खत्म हुआ।
इससे पहले शपथ ग्रहण समारोह शुरू होते ही आप व भाजपा पार्षदों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। पार्षदों को शपथ दिलाने का कार्य पूरा होते ही दोनों पक्षों के पार्षद अपने नेताओं व दलों के नारे लगाने लगे। इस बीच पीठासीन अधिकारी ने महापौर चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया की तैयारी करने के लिए कुछ समय तक बैठक स्थगित कर दी। वे कुछ समय बाद जब सदन में आईं तो दोनों पक्षों के पार्षद नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे सदन की कार्रवाई नहीं चल सकती। उन्होंने बैठक को 15 मिनट तक स्थगित कर दिया। पुन: बैठक शुरू होने के दौरान भाजपा व आप के कुछ पार्षदों में गाली देने का आरोप लगाते हुए नोकझोंक शुरू हो गई और कुछ पार्षद सीटों पर चढ़ गए।
गौतम गंभीर के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप
भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि आप के पार्षद ने पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। एक अन्य पार्षद बैलेट पेपर के विषय में बात करने के लिए गलत तरीके से निगम सचिव के पास मंच तक चला गया। इसका विरोध करने पर आप पार्षद गाली देने लगे। इस पर हंगामा बढ़ गया। इस बीच पीठासीन अधिकारी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने का विरोध
सदन की बैठक शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी ने सबसे पहले मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने का निर्णय लिया। इस दौरान आप पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने उनके निर्णय का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बैठक की कार्यसूची में शपथ दिलाने के प्रस्ताव में पहले निर्वाचित पार्षदों का नाम लिखा हुआ है और उसके बाद मनोनीत पार्षदों का नाम लिखा है। इस कारण पहले निर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई जानी चाहिए, लेकिन पीठासीन अधिकारी परंपरा को तोड़ रही है और वे इसका विरोध करते हुए अपनी जगह पर बैठ गए। इसके बाद आप के कुछ पार्षद अपनी सीटों से खड़े होकर हंगामा करने का प्रयास करने लगे। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सभी को शांत करा दिया। इसी बीच पीठासीन अधिकारी ने मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलानी शुरू की। उन्होंने उन मनोनीत चार पार्षदों को भी दोबारा शपथ दिलाई, जिन्होंने 6 जनवरी को शपथ ली थी। उस समय हंगामा होने के कारण मनोनीत पार्षद गोल्डन बुक में हस्ताक्षर नहीं कर सके थे। मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने के दौरान आप के कुछ पार्षद विरोध स्वरूप टोका-टाकी और टिप्पणी करते रहे। इसके अलावा आप पार्षद बंटी गौतम के शपथ लेने के बाद भी बैठक में भाजपा व आप में टकराव की नौबत आई। दरअसल, उन्होंने शपथ में अरविंद केजरीवाल के नाम का उल्लेख कर दिया। इसका भाजपा पार्षदों ने कड़ा विरोध किया और दोबारा शपथ दिलाने की मांग की। इसके बाद पीठासीन अधिकारी ने बुलाया, लेकिन वे शपथ लेेने के लिए मंच पर नहीं आए। इस प्रकरण के मद्देनजर शपथ लेने के अंतिम दौर में भाजपा के कई पार्षदों ने प्रधानमंत्री का जयकारा भी लगाया। वहीं, आप पार्षदों ने केजरीवाल के नारे लगाए। इस तरह जैसे-जैसे सदन की कार्रवाई आगे बढ़ी वैसे-वैसे दोनों दलों के बीच टकराव बढ़ता गया।