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बचाव के चार उपाय: ठंड में ये लापरवाही कर सकती है आपको बहरा, खास तौर पर बाइक चलाने वाले रखें इस बात का ध्यान

Thu, 16 Jan 2025 07:39 PM IST
Vikas Kumar अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

अधिकतर रोगी 26 से 40 साल के बीच के अब तक आए हैं। जिनमें सबसे अधिक लड़के है। लड़के फैशन में बाइक चलाते समय न हेलमेट पहन रहे हैं और न ही कान को ठंड से बचने के लिए मफलर बांध रहे हैं।
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बहरेपन का अटैक - फोटो : freepik
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विस्तार
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ठंड में कान खोलकर घूमने वाले युवा बहरेपन के अटैक का शिकार हो रहे हैं। उनके कान सुन्न पड़ रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें कम सुनाई दे रहा है। ऐसी समस्या लेकर युवा राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रतिदिन 10 में से चार मरीज कान सुन्न हो जाने और सुनाई नहीं देने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इलाज कराने में देर कर रहे हैं। जिसके कारण उनका बहरापन पूरी तरह से ठीक नहीं हो रहा है। इनमें सबसे अधिक 26 से 40 साल के मरीज हैं।

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हेड नेक सर्जरी डॉक्टर मोनिका पटेल ने बताया कि पिछले साल ठंड में सात-आठ रोगी रोजाना आते थे, लेकिन इस साल बहरेपन की समस्या लेकर अधिक रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं। ठंड में बाइक चलाने के दौरान कान में कुछ बांधकर नहीं चलने के कारण ऐसा हो रहा है। रोगियों के कान के अंदर की धमनी में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे अचानक बहरापन आ जाता है। इसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। 30 दिन बीत जाने के बाद उपचार मददगार नहीं होता है, क्योंकि सक्रिय बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन क्षति स्थायी हो सकती है। जल्द से जल्द ईएनटी डॉक्टर से परामर्श किया जाना चाहिए।

युवाओं में लड़कों की संख्या अधिक
अधिकतर रोगी 26 से 40 साल के बीच के अब तक आए हैं। जिनमें सबसे अधिक लड़के है। लड़के फैशन में बाइक चलाते समय न हेलमेट पहन रहे हैं और न ही कान को ठंड से बचने के लिए मफलर बांध रहे हैं। इससे उन्हें ठंड लग रही है। जिससे बहरेपन का शिकार हो रहे हैं।

12 से 18 घंटे बहरेपन से बचने के लिए बेहद अहम
कान की धमनी में रक्त आपूर्ति बंद होने से अचानक बहरेपन के इलाज की लिए शुरुआत के 12 से 18 घंटे बेहद अहम होते हैं। इस दौरान रोगी को स्टीरॉयड और खून का बहाव बढ़ाने वाली दवा दी जाती है। पांच दिन से अधिक समय होने पर स्थायी बहरेपन का खतरा रहता है। इसके अलावा रिकवरी बहुत धीमी होती है।

इस कारण पड़ता बहरेपन का अटैक
कान के अंदर कॉक्लियर धमनी होती है। ठंड में तेज हवा लगने से इसमें सिकुड़न आती है। इससे कॉक्लियर धमनी में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है। रक्त आपूर्ति न होने पर कान का न्यूरो एपीथिलियम खराब होता है। इससे अचानक सुनाई पड़ना बंद हो जाता है।
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बचाव के लिए यह करें काम
- बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें
- बाहर निकलने पर कान पर मफलर जरूर बंधे
- देर रात की पार्टियों में जाएं तो कान, गला गर्म कपड़े से लपेटे रहें
- अचानक बहरापन आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
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