लीवर ट्रांसप्लांट के लिए बेटी बनी डोनर,
बीमा अस्पताल बना जान का दुश्मन
क्रासर
- कई महीने से मरीज को भटका रहे बीमा अस्पताल के डॉक्टर
- परेशान मरीज को इलाज दिलाने के लिए जुटे किसान, अस्पताल के बाहर किया प्रदर्शन
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। आमतौर पर लीवर या किडनी ट्रांसप्लांट होने में बड़ी दिक्कत डोनर के उपलब्ध नहीं हो पाने की वजह से होती है। लेकिन 55 साल के एक मरीज के लीवर ट्रांसप्लांट में खुद बीमा अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर परेशानी का कारण बन रहे हैं। लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधा अस्पताल में नहीं होने के बाद भी मरीज को रेफर नहीं किया जा रहा है। मरीज को कभी एम्स नई दिल्ली तो कभी कानपुर स्थित अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। शनिवार को भड़के मरीज के परिजनों ने बीमा अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। अब दो दिन का समय अस्पताल प्रशासन ने मांगा है जिससे मरीज को लेकर फैसला किया जा सके।
मरीज के समर्थन में शनिवार को किसान संगठन भी जुटे और बीमा अस्पताल सेक्टर-24 के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें सहयोग किसान एकता संघ, युवा क्रांति सेना, जीवन अर्पण संस्था और हिंदू रक्षा दल ने किया। प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने बताया कि मरीज सीबी थापा एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में ईएसआईसी के बीमा अस्पताल से ही उम्मीद बनी हुई थी। युवा क्रांति सेना के अध्यक्ष अविनाश सिंह ने बताया कि पिछले एक महीने में अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को काफी प्रताड़ित किया है, जो निंदनीय है। मरीज को एम्स भेज दिया गया। यहां मरीज के परिजनों को करीब 15 लाख रुपये का खर्च बता दिया गया। इसी तरह इंस्टीट्यूट आफ लीवर एंड बाइलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में भी बड़ा खर्च बताया गया। मरीज के परिजन इतना खर्च नहीं उठा सकते।
प्रदर्शन के बीच हंगामा बढ़ने पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से बातचीत परिजनों की कराई। इसमें दो दिन का समय किसान नेताओं से मांगा गया है जिससे मरीज के बारे में फैसला किया जा सके। दो दिन में रेफर नहीं किए जाने पर दोबारा से महापंचायत और प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, परिजन किसी अच्छे निजी अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि बेटी ट्रांसप्लांट के लिए अपने लीवर का अंश देने को तैयार है। मैच नहीं होने पर बेटा भी डोनर बनने को राजी है। परिजनों का कहना है कि मरीज की तबियत बिगड़ रही है। अभी भी मरीज की तबियत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।
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मैं अभी छुट्टी पर हूं
बीमा अस्पताल की निदेशक डॉ. सोना बेदी का कहना है कि मैं अभी छुट्टी पर हूं। ऐसे में मरीज को रैफर करने के बारे में कुछ नहीं बता सकती हूं। छुट्टी से वापस आने पर मरीज की जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता पाऊंगी। जहां तक मेरी जानकारी में है कि मरीज अस्पताल में भर्ती है। उसकी अभी तबियत भी ठीक है।