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पहाड़ में मजदूरी और घर पर दूध बेचकर परिवार का गुजारा करता था रकबर उर्फ अकबर

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...इसलिए 60 हजार में गाय खरीदने गया था अकबर
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फिरोजपुर झिरका।
राजस्थान के थाना रामगढ़ इलाके से दुधारू गाय लाते वक्त कथित गौरक्षकों द्वारा मौत के घाट उतारे गए मेवात के कोल गांव निवासी रकबर उर्फ अकबर की पत्नी की दुनिया तो मानो थम सी गई है। अकेले सात बच्चों का भरण-पोषण कर पाना मुश्किल हो गया है। रकबर के पास 2 बीघा जमीन है जिसमें उसका परिवार रहता है। परिजनों का पेट गाय का दूध बेचकर और मजदूरी करके बमुश्किल भर पाता था। दूध-घी ज्यादा हो तो परिवार का गुजारा सही से हो जाएगा, यही सोचकर अकबर राजस्थान के गांव खानपुर से 60 हजार रुपए में दुधारू गाय खरीदकर 20 जुलाई को कोल गांव आ रहा था। रास्ते में कथित गौरक्षकों ने उसकी पिटाई की, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई।
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अकबर के घर में यूं तो पांच गाय हैं, लेकिन फिलहाल एक ही दूध दे रही है। परिवार के पास खेतीबाड़ी के लिए कोई जमीन नहीं है। मात्र 2 बिस्वा जमीन गांव में रहने के लिए है। जिसमें 10 गुणा 10 फीट का एक कमरा बना है और उसके पास में एक झोपड़ी बनाई हुई है। मृतक की पत्नी असमीना का कहना है कि पति को गाय लाने पर नहीं बल्कि मुसलमान होने की वजह से मारा गया है। बच्चों के भविष्य को सोचकर व्याकुल असमीना ने कहा कि हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उसके कंधों पर बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है। वह मजदूरी नहीं सकती। ऐसे में बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
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