बाइक कैब में निवेश के नाम पर 6500 लोगों को ठगा
नोएडा। बाइक बोट कंपनी की तर्ज पर एक और पाेंजी स्कीम लांच कर बाइक फॉर यू नाम की कंपनी ने देशभर के करीब 6500 लोगों से ठगी कर ली। सेक्टर-63 में चल रही बाइक फॉर यू कंपनी के संचालकों ने प्रति व्यक्ति से 60,250 हजार रुपये लिए। बदले में एक साल तक हर माह नौ हजार रुपये देने का झांसा दिया और करीब 40 करोड़ रुपये ऐंठकर फरार हो गई। बुधवार को सौ से अधिक लोग कोतवाली फेज थ्री पहुंचे और हंगामा किया।
कोतवाली फेज थ्री पुलिस के अनुसार, अगस्त 2018 में सेक्टर-63 के जी ब्लॉक में एक बिल्डिंग के भूतल पर कंपनी का कार्यालय था। इस कंपनी ने अपना एक ऑनलाइन विज्ञापन जारी कर लोगों को बताया कि ओला-उबर की तर्ज पर बाइक का संचालन एनसीआर में करेंगे। कोई भी व्यक्ति इसमें बाइक किराए पर लगवाने के लिए पैसे जमा कर सकता है। कंपनी खुद बाइक खरीदेगी और उसे कैब के तौर पर चलवाएगी। प्रत्येक व्यक्ति को 60,250 रुपये निवेश करने होंगे। कंपनी निवेशक को एक साल तक प्रत्येक माह 9 हजार रुपये देगी। इसके बाद देशभर के करीब 6500 लोगों ने इस कंपनी में निवेश कर दिया। निवेशकों के खाते में कुछ महीने तक तो पैसे दिए गए, लेकिन मार्च से पैसे नहीं मिले। कंपनी की तरफ से बार-बार पैसे देने का आश्वासन दिया गया। जब अप्रैल में भी पैसे नहीं आए तो निवेशकों को अपने साथ ठगी होने का संदेह हुआ। इसके बाद निवेशक कंपनी कार्यालय पहुंचने लगे। 17 अप्रैल को काफी संख्या में निवेशक कंपनी के दफ्तर पहुंचे थे। दफ्तर में कंपनी का मालिक नहीं था। इसके बाद निवेशकों ने हंगामा किया था। इसके बाद बुधवार को जब सौ से अधिक निवेशक कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि कंपनी भाग गई। कंपनी के बाहर एक बोर्ड लटका हुआ था। जिस पर लिखा था कि कंपनी बिल्डिंग खाली कर चली गई है। इसके बाद निवेशक भड़क गए।
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थाने पर की नारेबाजी
कंपनी के बंद होने की जानकारी लगने के बाद निवेशक नाराज होकर थाने पहुंच गए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी जांच की बात की तो निवेशक भड़क गए और थाने के बाहर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने सभी निवेशकों को समझाकर शांत कराया। दो घंटे थाने पर जमे रहने के बाद सभी निवेशक चले गए
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निवेश कराने पर मिलता था कमीशन
कंपनी की तरफ से कई तरह के प्रलोभन देकर लोगों को जोड़ा गया जो भी कंपनी में पैसा निवेश करता था। उन्हें बताया जाता था कि अगर किसी दूसरे से निवेश करवाना हो तो उसे चार से पांच फीसदी कमीशन मिलेगा। मुजफ्फरनगर निवासी अमित ने अकेले करीब 750 लोगों के पैसे इसमें निवेश करा दिए।
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कंपनी ने बदला प्लान तो हुआ था शक
दरअसल, पोंजी स्कीम वाली कंपनियां पहले से ही भागने की तैयारी में रहती हैं। इस कारण स्कीम व प्लान बदलती रहती हैं। शुरू में कंपनी ने एक साल तक प्रति माह नौ हजार देने की बात कही थी। कुछ महीने तक पैसे देने के बाद प्लान बदल लिया और 18 महीने तक छह हजार रुपये देने की बात कही। इसका निवेशकों ने बहुत विरोध किया था। इस दौरान निवेशकों को ठगी का शक हुआ था। कंपनी ने कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी प्लान में शामिल कर दिया। इसका निवेशकों ने विरोध किया और 17 अप्रैल को कंपनी में पहुंचकर हंगामे के साथ तोड़फोड़ की। इस दौरान कुछ निवेशक इलेक्ट्रॉनिक के सामान लेकर फरार हो गए। दिल्ली पुलिस के दो सिपाहियों ने भी इस कंपनी में लाखों रुपये का निवेश किया था। बुधवार को दोनों सिपाही भी फेज थ्री थाने पहुंचे थे।
नोएडा पहले भी हुआ है बदनाम
पोंजी स्कीम के नाम पर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने का यह पहला मामला नहीं है। नोएडा तब सुर्खियों में आया था। जब वर्ष 2016 में एब्लेज इंफो के नाम पर अनुभव मित्तल व उनके संबंधियों ने करीब 3800 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। मामले की जांच स्पेशल टीम कर रही है। अनुभव मित्तल व अन्य डायरेक्टर जेल में हैं, लेकिन निवेशकों के पैसे वापस नहीं किए गए। कुछ महीने पहले बाइक बोट के नाम पर ठगी का मामला सामने आया था। हाल में ही ई-सारथी नाम से एक और पोंजी स्कीम का खुलासा हुआ था। इस मामले में कोतवाली सेक्टर-58 में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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मामले की जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस पीड़ितों से बातचीत कर आरोपियों के बारे में पता कर रही है। इस मामले में भी कानून के मुताबिक कार्रवाई जाएगी।
- सुधा सिंह, एसपी सिटी।