विभागाध्यक्ष पर मी टू मामले में जांच कमेटी गठित
छात्राओं ने सोशल मीडिया पर चलाया है अभियान, कई जगहों पर की शिकायत, विभागाध्यक्ष के विवि आने पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटर नेशनल यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपिस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. सेंथिल पी कुमार के खिलाफ विवि की छात्राओं ने उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाया था। मामले में विश्वविद्यालय ने जांच कमेटी गठित कर 10 मई तक रिपोर्ट देने को कहा है। प्रबंधन ने विभागाध्यक्ष के विवि प्रवेश पर रोक लगा दी है। विभाग की छात्राओं ने फेसबुक और सोशल साइट्स पर मी टू का आरोप लगाकर अभियान चलाया है। वहीं, 14 छात्राओं ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट की वुमन सेल में भी शिकायत की है।
आरोप है कि सेमिनार या अन्य कार्यक्रमों में बुलाने के लिए विभागाध्यक्ष स्वीट हार्ट, स्वीट समेत तमाम शब्दों का प्रयोग करते थे। वाह्ट्सएप पर भी किसी संदेश के साथ इन शब्दों का प्रयोग करते थे। लगातार ऐसे संदेश मिलने पर छात्राओं ने फेसबुक पर ग्रुप बना लिया। फिर सोशल मीडिया पर मी टू अभियान शुरू कर दिया। विभाग की 100 से अधिक लड़कियां अभियान में शामिल हो चुकी हैं। छात्राओं का आरोप है कि विभागाध्यक्ष लंबे समय से ऐसा कर रहा था। वहीं, बताया जा रहा है कि आरोपी ने विवि प्रबंधन को सफाई दी है कि वह दोस्ताना माहौल के लिए ऐसा करता था। छात्राओं के शोषण का कोई इरादा नहीं था।
दस मई तक रिपोर्ट देगी कमेटी
विवि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। पीड़ितों की ओर से सीधी शिकायत नहीं आई है। विवि को दूसरे माध्यम से शिकायत मिली है। विवि ने सोशल मीडिया से भी संज्ञान लिया है। एक कमेटी बनाई गई है। जिसमें एक महिला प्रोफेसर भी हैं। कमेटी जांच कर तीन दिनों में दस मई तक रिपोर्ट सौंपेगी। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. प्रोफेसर आरडी शर्मा, वीसी एनआईयू
चार माह पूर्व ही दूसरा विवि छोड़कर आए थे
बताया जा रहा है कि विभागाध्यक्ष चार माह पूर्व ही ग्रेटर नोएडा के एक विवि छोड़कर आए थे। लोगों का कहना है कि पूर्व विवि में भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आने के बाद उन्हें विवि छोड़ना पड़ा था। हालांकि, पूर्व विवि ने इससे इंकार करते हुए एकेडेमिक आधार पर विवि छोड़ने की बात कही है