सांसद और पत्नी के खिलाफ
शिकायत पर फैसला सुरक्षित
- निशिकांत दुबे दंपती पर रियल एस्टेट कारोबारी ने लगाया था दो करोड़ मांगने और मारपीट का आरोप
धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली। अदालत ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे व उनकी पत्नी के खिलाफ शिकायत पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने एक रियल एस्टेट कारोबारी संदीप शर्मा की दो करोड़ रुपये मांगने व मारपीट की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।
पटियाला हाउस अदालत के एसीएमएम समर विशाल ने संदीप की शिकायत पर तीन अप्रैल 2014 को थाना तुगलक रोड को एफआईआर दर्ज कर जांच का निर्देश दिया था। इस एफआईआर में कहा गया था कि सांसद दंपती 19 नवंबर 2013 को संदीप के घर में घुसे और मारपीट कर दो करोड़ रुपये मांगे। दिल्ली पुलिस ने इस केस में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। संदीप ने इसके खिलाफ सत्र अदालत में विरोध याचिका दायर की। सत्र अदालत ने इसका निपटारा शिकायतकर्ता के पक्ष में करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई और उसका पक्ष सुनने का निर्देश दिया था।
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्तूबर 2014 को दाखिल क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि सांसद व उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। शिकायतकर्ता ने इसके खिलाफ 15 नवंबर 2014 को विरोध याचिका दायर की। इसका निबटारा करते हुए सत्र अदालत ने 21 जनवरी 2015 को क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर पुलिस को आगे जांच का निर्देश दिया। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की तो शिकायतकर्ता ने इसके विरोध में 26 नवंबर 2016 को याचिका दायर की। कोर्ट ने 7 अप्रैल 2017 को याचिका खारिज कर क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
एक बार फिर संदीप शर्मा ने सत्र अदालत में इसे चुनौती दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने इस पर फैसले में कहा था कि निचली अदालत के फैसले में कई खामियां हैं। इस मामले में संज्ञेय अपराध के आरोप हैं। निचली अदालत इस मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी विरोध याचिका अथवा शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता को साक्ष्य पेश करने का निर्देश दे सकती थी।