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मरीजों को चूना लगाकर करते थे विदेश की सैर, लाइसेंस निरस्त

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निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने में डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त
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- एमसीआई ने एक वर्ष के लिए लाइसेंस को किया निरस्त
- सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर पर लगे थे आरोप

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सर्जरी के दौरान तिरमादारों से निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाकर विदेश की सैर करने के आरोपी सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर नवल भाटिया का लाइसेंस एमसीआई ने एक वर्ष के लिए निरस्त कर दिया है। एमसीआई ने यह फैसला दिल्ली मेडिकल काउंसिल के वर्ष 2012 के मामले में सुनाया है। हालांकि दिल्ली मेडिकल काउंसिल के निर्देश मिलने के बाद तीन माह तक डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त रहा। अब एमसीआई का रुख भी सख्त होने के कारण नौ माह और उन्हें मरीजों के इलाज से दूर रखा जाएगा।
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बुधवार को दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने इसको लेकर एक लिखित आदेश जारी कर दिया। काउंसिल सचिव डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि यह मामला जुलाई 2012 का है। डॉक्टर भाटिया पर आरोप था कि वो हांगकांग ट्रेनिंग के लिए गए थे। इसका खर्च किसी प्राइवेट कंपनी ने उठाया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद साल 2014 में डीएमसी ने डॉक्टर भाटिया का रजिस्ट्रेशन तीन महीने (90) के लिए निरस्त कर दिया था। दरअसल, घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के अलावा अन्य सर्जरी से जुड़े सामान पर डॉक्टरों की कमाई होती है। कई निजी कंपनियां इसके लिए डॉक्टरों को ग्रीष्म और शीत काल के अनुसार विदेशों की सैर कराती है। हालांकि अभी तक इस तरह की प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ शिकायत आने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती थी, लेकिन एमसीआई और डीएमसी के सख्त रुख ने इस तरह की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को कठोर संदेश भी दिया है।
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