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एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

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नोट : हरदोई व औरैया यूपी के लिए उपयोगी....
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नोएडा, गाजियाबाद व फरीदाबाद के लिए भी उपयोगी....

एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने
वाले गिरोह का पर्दाफाश
- अपराध शाखा ने ठगी करने वाले गिरोह के दो बदमाशों को दबोचा
- 200 से ज्यादा लोगों के साथ कर चुके हैं ठगी, दिल्ली व एनसीआर में करते थे वारदात
- आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों के 37 एटीएम कार्ड बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर दो बदमाशों को दबोचा है। आरोपी करीब 200 लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। ये एटीएम बूथ में एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करते थे। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंक के करीब 37 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से ठगी के 15 मामलों को सुलझाने का दावा किया है। आरोपी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद व फरीदाबाद में वारदात करते थे।
अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के अनुसार, पुलिस टीम को सात जुलाई को सूचना मिली थी कि दो जालसाज अरुण कुमार व ऋषि कुमार चोरी की बाइक पर पटपड़गंज पोस्ट ऑफिस के पास आएंगे। सूचना के बाद एसीपी जसवीर मलिक की देखरेख में इंस्पेक्टर नीरज चौधरी की विशेष टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने यहां घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। इनके कब्जे से गोविंदपुरी इलाके से चुराई गई बाइक बरामद की गई। अरुण कुमार के कब्जे से 20 और ऋषि कुमार के कब्जे से 17 एटीएम कार्ड बरामद किए गए। आरोपियों ने बताया कि वह साथी इमरान, अब्बास उर्फ राकेश, अंकित आदि के साथ एटीएम कार्ड से ठगी करते थे।
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ठगी के आरोप में अरुण कुमार वर्ष 2015 में कालकाजी और 2017 में प्रीत विहार में गिरफ्तार हुआ था। आरोपियों ने बताया कि वह ठगी की रकम को महंगे मोबाइल व कपड़े खरीदने और गर्लफ्रेंड को प्रभावित करने में खर्च करते थे। अरुण कुमार (26) हरदोई यूपी और ऋषि कुमार (23) औरेया, यूपी का रहने वाला है। ऋषि कुमार पहले भी गिरफ्तार हो चुका है।
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- ऐसे करते थे ठगी
आरोपी पहले वारदात के लिए एटीएम बूथ को चुनते थे। गिरोह का एक बदमाश एटीएम में जाता था और एटीएम में पैसे निकाल रहे पीड़ित के पासवर्ड को गौर से देख लेता था। गिरोह का दूसरा व तीसरा सदस्य एटीएम में जाता था और पीड़ित से कहता था कि ट्रांजेक्शन क्लियर नहीं हुआ है। वह क्लियर का बटन दबाए। जब पीड़ित इस बटन को दबाता था तभी आरोपी एटीएम कार्ड को बदल देते थे। इसके बाद ये पीड़ित के खाते से पैसे निकाल लेते थे। ये गिरोह पूरे एनसीआर में सक्रिय था।
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