साहिब का शव गांव लाए, 14 दिन चला धरना उठाया
पुन्हाना। गत 7 अगस्त को गांव पटाकपुर में कथित तौर पर पुलिस की गोली से मारे गए साहिब का शव सोमवार को 14 दिन बाद उसके गांव नहेदा लाया गया, जहां मंगलवार को दफानाया जाएगा। इससे पहले पुन्हाना की अनाज मंडी में आयोजित महापंचायत में कई अहम फैसले लिए गए। पंचायत की कोर कमेटी धरने को समाप्त करने और 24 अगस्त को नूंह में प्रदर्शन करने का फैसला लिया। कोर कमटी की ओर से साहिब के परिवार को 10 लाख की आर्थिक सहायता दी गई, वहीं साहिब की मौत मामले की कानूनी लड़ाई के लिए जिले के वरिष्ठ एडवोकेट और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में बडे़ वकीलों को साथ लेकर लड़ने का फैसला लिया गया।
महापंचायत में इनेलो विधायक ज़ाकिर हुसैन, नसीम अहमद और कांग्रेस व इनेलो पार्टी ने साहिब हत्याकांड को विधानसभा के मानसून सत्र में उठाने का भरोसा दिलाया। पंचायत ने यह भी फैसला लिया की कोर कमेटी जल्द ही राज्यपाल से मिलकर उन्हें साहिब हत्याकांड से अवगत कराएगी। इस मौके पर जुटे नेताओ ने 14 दिन तक चले धरने के दौरान शांति बनाए रखने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चाहती थी कि धरने बेठे लोग उग्र हो, ताकि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा सकें और इस तरह साहिब हत्याकांड अलग मोड़ दिया जाए।
विधायक जाकिर हुसैन व कांग्रेस सरकार में पूर्व परिवहन मंत्री आफताब अहमद ने कहा कि भाजपा जैसी निक्कमी सरकार आज तक नहीं देखी। पुलिस की गोली से मारे गए साहिब का शव 14 दिन तक दफनाया नहीं गया और इंसाफ के लिए लोग धरने पर बैठे रहे लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा बात सुनने नहीं आया। सरकार इस बात का इंतजार करती रही कि कब लोग उग्र हों और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्हंोने कहा कि लड़ाई अभी रुकी नहीं है बल्कि इंसाफ मिलने तक जारी रहेगा।
कोर कमेटी की तरफ से एडवोकेट रमजान चौधरी ने कहा कि जिले के नेताओं ने पहली बार ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसमें मृतक के परिवार को सरकार की ओर से नहीं बल्कि लोगों की ओर से दस लाख रुपये की सहायता देना की घोषणा की गई है।
महापंचायत में पूर्व मंत्री चौधरी मोहम्मद इलयास, पूर्व डिप्टी स्पीकर आजाद मोहम्मद, मामन खान इंजीनियर, पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान, अख्तर हुसैन, मास्टर बदरूद्दीन, जावेद अहमद सोहना, सुभान खां गोहता, महताब अहमद, ऐजाज काटपुरी, साहब खां पटवारी, ताहिर हुसैन एडवोकेट, अख्तर काटपुरी, इसराईल कोट, इकबाल जेलदार, हाजी सुबराती खान, हाजी इसराईल सहित समाजसेवी, वकील और युवा शामिल हुए।