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सुबूतों के अभाव में कोर्ट से छूटे नकली शराब के आरोपी

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सुबूतों के अभाव में कोर्ट से छूटे आरोपी
- 19 वर्ष पहले जेवर में नकली शराब फैक्ट्री कर मामला, पुलिस को नहीं मिले स्वतंत्र गवाह
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
19 वर्ष पहले जेवर में नकली शराब की फैक्ट्री पकड़ने के मामले में पुलिस आरोपों को साबित नहीं कर पाई। कई दस्तावेज पूरे नहीं थे और बरामद किए माल में सील तक गायब थी। अडिशनल सेशन जज-2 नलिन कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस आरोपों को साबित करने में नाकाम रही जिससे सुबूतों के अभाव में आरोपी छूट गए।
जेवर पुलिस ने दो मई 1999 को देशी शराब के ठेके पर नकली शराब तैयार करने के आरोप में जेवर निवासी राकेश समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। एक व्यक्ति मौके से फरार हो गया था। मौके से भारी मात्रा में अधबनी नकली शराब और उसे बनाने के उपकरण बरामद करने का दावा किया गया था।
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न्यायालय में सुनवाई के दौरान पुलिस यह साबित करने में नाकाम रही कि वह छापा मारने के लिए टीम थाने से किस समय रवाना हुई थी। कोर्ट में पुलिस ने जो बरामद माल पेश किया, वह टूटी-फूटी हालत में था। कोर्ट में गवाह के रूप में तत्कालीन एसएसआई रामप्रकाश ने कहा कि पेश किए माल पर वह सील या मुहर नहीं है, जो उन्होंने घटना के समय लगाई थी। न्यायालय ने आदेश में कहा कि पुलिस ने जानबूझकर स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया। घटनाक्रम और घटना स्थल की स्थिति संदिग्ध है। गवाहों में विरोधाभास है। इसके आधार पर कोर्ट ने राकेश को दोषमुक्त कर दिया।
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पुलिस नहीं साबित कर पाई शराब नकली थी
पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि बरामद शराब नकली थी। पुलिस ने अपनी गवाही में कहा कि छापेमारी के समय रात होने के कारण कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला। जबकि केस डायरी में कहा गया कि जनता के लोग मिले थे, लेकिन बुराई मोल लेने के डर से कोई गवाह बनने को तैयार नहीं हुआ।
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संदीप वर्मा
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