पीलीभीत। पंचायती राज विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एमएलसी के हस्तक्षेप के बाद भी अफसर जांच की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सके हैं। संबंधित कर्मचारी के खिलाफ प्रधान भी कई बार शिकायत कर चुके हैं। कर्मचारी के मूल पद पर कार्य न किए जाने से दोनों विभागों का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
पंचायती राज विभाग में सचिवों के बहाली से लेकर पंचायत आवंटन तक जमकर खेल हो रहा है। मामला मूल पद से हटाकर पंचायती राज विभाग में संबद्ध किए गए कर्मचारी हैं। रामपाल, प्यारेलाल, कालीचरन, माया देवी सहित अन्य प्रधानों ने डीएम से शिकायत जून में शिकायत की थी। आरोप लगाया कि पंचायत निरीक्षक उद्योग के पद पर तैनात संजय प्रकाश सक्सेना को विभागीय सांठगांठ से पंचायती राज विभाग में संबद्ध किया है। कर्मचारी प्रधान और सचिव पर दबाव बनाने के लिए पूर्व प्रधानों से शपथ पत्र के माध्यम से शिकायत लेकर उन्हें धमकाता है। इसके बाद उनसे रुपयों की मांग करता है। मामले की शिकायत पर डीएम ने विभागीय अफसरों को जांच सौंपी। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की जा सकी। इसके बाद एमएलसी सुधीर गुप्ता ने भी खुद के लेटर पैड पर संबंधित कर्मचारी की शिकायत की। इसके बाद भी अफसरों की जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी।
मूल पद पर न होने से दो विभागों का कार्य हो रहा प्रभावित
शिकायतकर्ताओं ने जिस कर्मचारी की शिकायत की है, वह पंचायत उद्योग में निरीक्षक के पद पर तैनात है। मूल पद पर न रहने से वहां का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। वहीं पंचायत विभाग कार्यालय में कर्मचारी जमकर गोलमाल कर रहा है। इससे पंचायती राज विभाग का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
कई शिकायतों में नोटिस तक ही सिमट जाती है कार्रवाई
पंचायत राज विभाग की ओर से प्रधान व सचिवों को नोटिस जारी करने का सिलसिला रोजाना होता है। इसमें महज नोटिस जारी होने तक ही कार्रवाई की जाती है। संबंधित के जवाब न देने पर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता है। इसमें भी रुपयों का खेल कर विभागीय अफसरों को गुमराह किया जाता है।
मामले को लेकर शिकायत की गई है। इसको लेकर जांच समिति गठित की गई है। जांच टीम की ओर से आख्या मिलते ही संबंधित कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।- रोहित भारती, डीपीआरओ।