पुलिस को दी गई तहरीरों में पीड़ितों ने बताया है कि वे अपने जीवनभर की जमा पूंजी, पेंशन, एलआईसी मनीबैक और जमीन बेचकर प्राप्त रकम तक कंपनी में डाल चुके हैं। ठगी के शिकार अधिकतर मिडिल क्लास परिवार, छोटे व्यापारी, प्राइवेट कर्मचारी और बेरोजगार युवा हुए हैं जिन्हें कंपनी ने कम रुपयों में बड़े रिटर्न का सपना दिखाया था।
निवेश पर अच्छे रिटर्न का झांसा देकर ट्रेड आस्था कंपनी ने झारखंड से लेकर यूपी के कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर तक सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। पुलिस की जांच में मामला सामने आने के बाद कंपनी के निदेशक और उसके गुर्गों की तलाश में क्राइम ब्रांच जुट गई है। एक आरोपी की लोकेशन कोलकाता में मिलने के बाद पुलिस की टीमें बाहर भी दबिश दे रही हैं।
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ट्रेड आस्था कंपनी ने कुछ साल पहले ऑनलाइन-ऑफलाइन माध्यम से निवेशकों को जोड़ना शुरू किया था। कंपनी के प्रतिनिधि 10 से 20 प्रतिशत महीने के रिटर्न का लालच देते थे। निवेशक जितनी बड़ी रकम लगाते, कंपनी उसी अनुपात में अधिक मुनाफे का दावा करती। शुरुआत में कुछ लोगों को पेमेंट कर कंपनी ने विश्वास जीता, फिर अचानक सर्वर डाउन, खाते सीज और ऑडिट जैसी बहानेबाजी शुरू हो गई।
धीरे-धीरे कार्यालय बंद हो गए, फोन स्विच ऑफ और वेबसाइट भी बंद हो गई। इसी ठगी के खिलाफ लखनऊ के क्राइम ब्रांच, गोरखपुर के शाहपुर, गुलरिहा और देवरिया में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज है।
पुलिस को दी गई तहरीरों में पीड़ितों ने बताया है कि वे अपने जीवनभर की जमा पूंजी, पेंशन, एलआईसी मनीबैक और जमीन बेचकर प्राप्त रकम तक कंपनी में डाल चुके हैं। ठगी के शिकार अधिकतर मिडिल क्लास परिवार, छोटे व्यापारी, प्राइवेट कर्मचारी और बेरोजगार युवा हुए हैं जिन्हें कंपनी ने कम रुपयों में बड़े रिटर्न का सपना दिखाया था।
गोरखपुर क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया कि कंपनी के निदेशक ने झारखंड के अलावा कानपुर और लखनऊ में भी नेटवर्क तैयार किया था। यहां उसके स्थानीय एजेंट निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सेमिनार, होटल मीटिंग और सोशल मीडिया कैंपेन चलाते थे। कंपनी के टारगेट अक्सर ऐसे लोग होते थे जिन्हें फाइनेंस की ज्यादा जानकारी नहीं थी।
जांच में सामने आया कि कंपनी का एक मुख्य आरोपी मोबाइल लोकेशन बदलता हुआ पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में सक्रिय पाया गया है। पुलिस टीम उसके संभावित ठिकानों की पहचान कर रही है। अन्य दो गुर्गों की तलाश कानपुर और झारखंड में जारी है।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने पीड़ितों से किया संपर्क
दर्ज प्राथमिकी में पीड़ितों की ओर से दिए गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि कंपनी ने पोंजी स्कीम की तरह निवेशकों के रुपये दूसरे निवेशकों को पेमेंट कर भरोसा दिलाया। इसके बाद करोड़ों रुपये लेकर भाग गई।
क्राइम ब्रांच ने पीड़ितों से ट्रांजेक्शन डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है ताकि ठगी की कुल रकम और संबंधित खातों की पहचान की जा सके। वहीं पुलिस अधिक से अधिक पीड़ितों को सामने आने की अपील कर रही है, क्योंकि आशंका है कि ठगी की वास्तविक रकम दर्ज प्राथमिकी से कई गुना अधिक हो सकती है।
पूरी कार्रवाई पर नजर रखी जा रही है। यह मामला एक बड़े इंटर-स्टेट फाइनेंशियल फ्रॉड की तरफ इशारा करता है, जिसमें आरोपी संगठित नेटवर्क के साथ काम कर रहे थे। कुछ आरोपियों की लोकेशन मिली है। जल्द ही निदेशक और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया जाएगा: सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम ब्रांच
इन आरोपियों की तलाश कर रही क्राइम ब्रांच
ट्रेड आस्था कंपनी के निदेशक विश्वजीत श्रीवास्तव, उसकी पत्नी चंदा, नवीन श्रीवास्तव, नवीन चंद्र, मीनाक्षी, हरकेश, सोनू गुप्ता, राहुल, सुदामा कुशवाहा, चंदन शर्मा, फैजल, अविनाश सिंह समेत अन्य।