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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या मामले में अदालत 29 को सुनाएगी फैसला

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नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या मामले में अदालत 29 फरवरी को फैसला सुनाएगी। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अदालत ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 20 दिसंबर 2019 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में नौ अप्रैल 2018 में मौत हो गई थी। सीबीआई ने इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य कई लोगों पर पीड़िता के पिता की हत्या का आरोप है।
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तीस हजारी अदालत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हत्या मामले में अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद बृहस्पतिवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले की सुनवाई बंद कोर्ट रूम चल रही है। इस मामले की सुनवाई को अन्य मामलों के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने बताया कि सीबीआई ने आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता के चाचा, मां, बहन व पिता के सहकर्मी समेत 55 गवाहों के बयान दर्ज करवाए तो वहीं बचाव पक्ष ने नौ गवाहों को पेश किया।
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सीबीआई के मुताबिक तीन अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता व आरोपी शशि प्रताप सिंह के बीच झगड़ा हुआ था। सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में कहा कि मृतक व उसका सहकर्मी उस दिन अपने गांव माखी लौट रहे थे। उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप से लिफ्ट मांगी जो उसने देने से मना कर दिया। इस पर दोेनों के बीच झगड़ा हुआ था। इस पर शशि प्रताप सिंह ने अपने साथियों को बुला लिया था। इसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर का भाई अतुल सिंह सेंगर अन्य लोगों के साथ वहां पहुंच गया था। इन आरोपियों ने पीड़िता के पिता व उसके सहकर्मी की पिटाई की थी।
सीबीआई का कहना है कि इसके बाद यह आरोपी पीड़िता के पिता को थाने ले गये थे और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इस प्रकरण के बीच कुलदीप सिंह सेंगर डीएसपी व थाना प्रभारी माखी अशोक सिंह भदौरिया के संपर्क में था। उसने बाद में पीड़िता के पिता का मेडिकल करने वाले डॉक्टर से भी बात की थी।
अदालत ने इस मामले में कुलदीप सेंगर, उसके भाई अतुल, अशोक सिंह भदौरिया, उप निरीक्षक कामता प्रसाद, सिपाही आमिर खान व छह अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस की सुनवाई एक अगस्त को यूपी से दिल्ली ट्रांसफर कर दी गई थी। इसके बाद तीस हजारी अदालत ने इस मामले में कुछ धाराएं जोड़ी थीं।
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2019 में एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी थी जिसमें दुष्कर्म पीड़िता व उसके परिजन तथा वकील यात्रा कर रहे थे। इस हादसे पीड़िता की चाची व मौसी की मौत हो गई थी। हादसे में गंभीर रूप से जख्मी पीड़िता को लखनऊ के अस्पताल से दिल्ली एम्स लाया गया था। उसे राजधानी में ही सीआरपीएफ की सुरक्षा में आश्रय मुहैया करवाया गया है।- एजेंसी
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