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UP: अखलाक मॉब लिंचिंग में केस वापसी की याचिका अदालत ने निरस्त की, अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी

Tue, 23 Dec 2025 01:48 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

मामला 28 सितंबर, 2015 का है। दादरी थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में भीड़ ने घर में घुसकर अखलाक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। अफवाह थी कि उसके घर में गोमांस रखा हुआ था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव के बहुचर्चित मो. अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने की यूपी सरकार की अर्जी खारिज कर दी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दादरी में वर्ष 2015 की इस भीड़ हिंसा को समाज के खिलाफ गंभीर अपराध बताया।

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अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय संख्या-1 गौतमबुद्धनगर सौरभ द्विवेदी ने ट्रायल को बेहद जरूरी श्रेणी में डालकर रोजाना सुनवाई का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने केस वापस लेने की दलीलें पेश की। हालांकि कोर्ट ने कहा कि याचिका आधारहीन व महत्वहीन है। अदालत ने साफ कर दिया कि आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। केस की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीड़ित पक्ष ने दलील दी कि वह प्रत्यक्ष गवाह है। उसे केस की वापसी पर आपत्ति दर्ज कराने तथा सुने जाने का पूरा अधिकार है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। इससे पहले, मामले को 18 दिसंबर को सूचीबद्ध किया गया था और बाद में 23 दिसंबर को सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया था। 

सरकार ने सामाजिक सद्भाव का हवाला देकर दी थी याचिका
यूपी सरकार ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का हवाला देते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। आवेदन राज्य सरकार और अभियोजन के संयुक्त निदेशक के निर्देशों के बाद सहायक जिला सरकारी अधिवक्ता (फौजदारी) भाग सिंह भाटी ने याचिका दायर की थी।
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गोमांस रखने के शक में भीड़ ने कर दी थी हत्या
मामला 28 सितंबर, 2015 का है। दादरी थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में भीड़ ने घर में घुसकर अखलाक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। अफवाह थी कि उसके घर में गोमांस रखा हुआ था। इस घटना ने भीड़ हिंसा पर देशव्यापी बहस को जन्म दिया था। इस हमले में अखलाक का बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया था।

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